चित्रा न्युज प्रतिनिधी
भंडारा : प्रसिद्ध वक्ता, ध्यानयोग ज्ञाता मिलनसार व्यक्तित्व के धनी डॉ. यशवंत टीकाराम गायधनी का हाल ही में ७५ वा जन्मदिन पतंजलि योग समिति (मिस्कीन गार्डन)भंडारा द्वारा आयोजित कर उनको याद किया गया. मिस्कीन गार्डन में शांतिपूर्ण वातावरण में आयोजित कार्यक्रम में योग साधकों,मित्रों ने उनके फोटो पर माल्यार्पण तथा पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें आदरांजलि दी.
मंच पर अध्यक्ष के रूप में प्रमुख योग शिक्षक शाम कुकडे,सदानंद इलमें, सईद भाई शेख,अतुल वर्मा, चिंधूजी बुधे,मधुकर गभने तथा योगसाधक,मित्र उपस्थित थे.अध्यक्ष शाम कुकडे ने उनके जीवन पटल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "वे बहुत ही मिलनसार,निष्ठावान व्यक्तिमत्व थे तथा उन्होंने ही भंडारा में सर्वप्रथम मुझे योग,प्राणायाम की क्लास शुरू करने हेतु प्रेरित किया था,तथा उनकी ही प्रेरणा का परिणाम है कि आज भंडारा जिले में योग,प्राणायाम से बड़ी तादाद में योग साधक जुड़कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे है".सदानंद इलमें, चिंधूजी बुधे,शेख आदि ने अपने मार्गदर्शन भाषण में उनकी मिलनसार वृत्ति,आयुर्वेद,ध्यान योग प्रति उनके कार्यों का विशेष उल्लेख किया.योग साधकों की सभा,कार्यक्रम हो या मित्र मंडलीआदि की महफिल वे अपनी विशेष हास्य शैली,दमदार मार्गदर्शन से सभी का मन मोह लेते थे.जवाहर नगर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की सेंट्रल स्कूल से प्रिंसिपल पद से वे कुछ वर्ष पूर्व सेवानिवृत हुए थे,वे योग_प्राणायाम,ध्यान_योग के अच्छे जानकर थे तथा अक्सर वे मेडिटेशन(, ध्यान ) के कैंप,क्लास भी लिया करते थे,अध्यात्म,अनेक वनस्पति ,आयुर्वेदिक औषधियों का उन्हें अच्छा ज्ञान भी था,जिसे अनेक व्याधियों,बीमारी से ग्रस्त लोगों को लाभ पहुंचाने हेतु वे हमेशा तत्पर भी रहते थे.वे पतंजलि योग समिति से जुड़े थे तथा ग्रीन हेरिटेज सोशल फाउंडेशन के कार्यकारिणी सदस्य रहे. स्वास्थ्य के बराबर साथ नहीं देने से वे विगत ०७/०७/२०२४ को दुनिया छोड़ गए.परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे है.बड़ा बेटा आकाश इंग्लैंड के न्यूकैसल में तथा छोटा बेटा पराग सिंगापुर की नामांकित कंपनियों में नौकरी पर है.छोटा बाजार के क्रांति वार्ड स्थित उनकी १२० वर्ष पुरानी *राजगृह हवेली* जहां पहले मित्र_परिवार से गूंजा करती थी,आज उनके चले जाने से वीरान हो गई है. एक अच्छे,संस्कारी,मिलनसार हस्ती का अपने मित्र_परिवार को अचानक बीच में छोड़कर चले जाना एक बड़ी क्षति है परिवार और समाज के लिए।अब तो उनकी यादें ही शेष है।
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