[यह गुण हम में होना चाहिए।]
तथागत बुद्ध ने भिक्खुओं को संबोधित करते हुए कहा-
"भिक्षुओं ! यदि कोई मेरी निन्दा करे,धम्म की निन्दा करे अथवा संघ की निन्दा करे तो इसका तुम्हें बुरा नही मानना चाहिए। इससे तुम्हारे ह्रदय में जलन नही होनी चाहिए। इससे तुम्हें क्रोध नही आना चाहिए।
तब तुम्हें बताना चाहिए कि अमुक कारण है, यह बात ऐसी नही है, यह बात हम में नहीं पाई जाती है।
यदि कोई मेरी प्रशंसा करे,धम्म की प्रशंसा करे अथवा संघ की प्रशंसा करे, तो तुम्हें विशेष हर्ष नही होना चाहिए। न ही तुम्हारा ह्रदय खुशी से फूल जाना चाहिए।
यदि तुम ऐसे होंगे तो इससे भी तुम्हारी साधना में बाधा पडेगी।
जो बात यथार्थ हो उसे तुम्हें स्वीकार करना चाहिए। तुम्हें कहना चाहिए, इस कारण से ऐसा ही है, यह बात हमारे बीच में है, यह गुण हम में हैं ऐसा सोचना चाहिए।
नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼
11.08.2023


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