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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻 

[ राजगृह का धनिय कुम्हार ] 

"अप्पमादो अमत पदं, 
पमादो मच्चनो पदं।"
-
अप्रमाद निर्वाण का पद है और  प्रमाद मृत्यु का। 

"ते झायिनो साततिका,
निच्चं दळहपरक्कमा,
फुसन्ति  धीरा निब्बाणं ।" 

-ऐसे सतत ध्यान करने वाले,सजग, सदैव दृढ  पराक्रम में लगे धीर पुरूष निर्वाण को प्राप्त  कर लेते हैं। 

राजगृह का धनिय नामक कुम्हार अपने पूर्वभवों के  संचित पुण्यों के कारण तथागत के संपर्क में आया। तथागत के उपदेश  सुनकर मन में वैराग्य जागा और वह  भिक्खु संघ में प्रव्रजित हो गया। उसने भगवान से विपश्यना साधना  की विधि सीखी  और  एकांत  में जाकर साधना  करते हुए  अर्हन्त पद प्राप्त  कर लीया। धनिय  बडा संयमित  जीवन  जीते थे और  ध्यान भावना  में निरंतर रत रहते थे। किसी भिक्खु के जीवन में शिथिलता  देखकर उन्होंने उसे उद्बोधित करते हुए कहा- 

सुखञ्चे जीवितुं इच्छे-
यदि सुखपूर्वक  जीने की इच्छा है, 

सामञ्ञस्मिं अपेक्खवा-
यदि श्रमण  जीवन जीने की अपेक्षा है तो- 

इतरीतरेन तुस्सेय्य-
जो मिल जाय, उसी से संतुष्ट रहे, 

एकधम्मञ्च भावये- 
और  केवल एक ही धम्म का सेवन करे।
जो व्यक्ति केवल एक अप्रमाद का सेवन कर लेता है, उसके लिए  अन्य सारे कुशल धर्मो का सेवन सहज हो जाता है। 

नमो बुद्धाय 🙏🙏🙏
Ref: धम्मपद: अप्पमादो वग्ग
02.08.2023 

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