Ticker

6/recent/ticker-posts

जब कालिदास जी के यक्ष ने रामगिरी (रामटेक)पर्वत से अपनी विरहिणी को बादल के जरिए भेजा संदेश


चित्रा न्युज प्रतिनिधी 
भंंडारा:-आषाढ मास की पहली तिथि को ही वर्षा ऋतु का आगमन होता है. महाकवि कालिदास के अनुसार, आषाढ के पहले दिन जब रामगिरी(आज के रामटेक) पर्वत की चोटी पर उमडता हुआ मेघ (बादल)दिखाई देता है तो विरह की अग्नि में जल रहे यक्ष को अपनी पत्नी की याद सताने लगती है,तो मार्मिक प्रसंग व संदेश अपनी पत्नी ( विरहिणी)के  वियोग में व्याकुल यक्ष उस उमडते हुए बादल को अपना दूत बनाकर उसे अपनी प्रेमिका के नाम एक भावुक सन्देश सौपता है. ये संदेश मेघदूत ऋतु काव्य के रूप में प्रसिद्ध है. मेघदूत केवल प्रेमकथा ही नहीं है, इसमें पर्वत, नदियां, वृक्ष, पशु-पक्षी, गाँव आदि का सूक्ष्म,भावनात्मक, प्राकृतिक वर्णन भी है.कालिदास के वर्णन में रामगिरी (रामटेक)से शुरू होकर अमरकंटक, नर्मदा, विदिशा, उज्जयिनी, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार होते हुए अलकानगरी(हिमालय के मध्य कैलाश पर्वत के समीप)तक के यात्रा की झलक मिलती है.गत वर्ष के रामटेक- सफ़र का वर्णन भी आगे है.

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या