[अहो सुखं, अहो सुखं।]
भन्ते भद्दिय के उद्गार सुनकर सुनने वाले भिक्षुओ ने समझा कि भन्ते भद्दिय अपने,पूर्व गृहस्थ जीवन के राजसी सुखों को याद कर उद्गार निकालते है - "अहो सुखं, अहो सुखं।"
भन्ते भद्दिय पूर्व जीवन में शाक्य कुलीन राजा थे।
सम्यक सम्बोधि प्राप्त करने के बाद जब तथागत कपिलवस्तु गए, तब उनकी धम्म वाणी सुनकर अनेक लोग प्रव्रजित हुए थे। भगवान बुद्ध का चचेरे भाई अनुरूद्ध भी प्रव्रजित होने के लिए आतुर थे। परंतु उसकी मां उसको रोकती थी। जब अनुरूद्ध जिद्द करते रहा, तब उसे एक शर्त पर अनुमति दी कि यदि उसका मित्र शाक्य राजा भद्दिय प्रव्रजित होने के लिए तैयार हो। भद्दिय उस समय जनतंत्र का जिम्मेदार राजा था। माता सोचती थी कि भद्दिय कभी भी घर छोडने के लिए तैयार नहि होगा। परंतु अनुरूद्ध ने राजा भद्दिय को प्रव्रज्या लेने के लिए तैयार किया। राजा भद्दिय और अनुरूद्ध, आनंद, भृगु, किम्मिल और देवदत्त के साथ भगवान के पास प्रव्रजित हुए।
राजा भद्दिय अब राजा नहि भिक्खु हो गया था। भगवान की बताई विपश्यना साधना का अभ्यास करते हुए भद्दिय शीघ्र ही अरहंत अवस्था को प्राप्त हुए। उस अनुत्तर अवस्था का जीवन जीते हुए उनके मुँह से उद्गार निकल पडे-
"अहो सुखं, अहो सुखं ।"
अन्य भिक्खुओ ने समझा कि भिक्खु भद्दिय अपने पूर्व जीवन के सुख को याद करते है।
तथागत ने उन नासमझ भिक्खुओं का भ्रम दूर करने के लिए उनके सम्मुख भिक्खु भद्दिय को बुलाए और उनके उन उद्गारों का कारण पूछा।
भिक्खु भद्दिय ने कहा-
जब कोई राजा के पद पर होता है तब उसकी सुरक्षा का कडा प्रबंध किया जाता है। महल के भीतर भी, बहार भी, नगर के भीतर भी, बहार भी, जनपद के भीतर भी, बहार भी, सुरक्षा की चुस्त व्यवस्था होती है। यह सब होते हुए भी राजा की जान को खतरा बना रहता है।
"एवं रक्खितो गोपितो सन्तो,
भीतो उब्बिग्गो उस्सङ्की उत्रासी विहासिं"
- यों पहरों के बीच सुरक्षित रखा हुआ भी मैं सदा भयभीत, उद्विग्न, सशंक और संत्रस्त रहता था और अब अकेला ही अरण्य में रहते हुए, पेड के तले रहते , शून्यागार में रहते हुए भी,
"अभीतो अनुब्बिग्गो, अनुस्सङ्की, अनुत्रासी"
- अभीत, अनुद्विग्न, अशंक और असंत्रस्त रह कर,
"अप्पोस्सुक्को पन्नलोमो परदत्तवुत्तो, मिगभूतेन चेतसा विहरामि"
- अनुत्सुक, शांत और पराये दान पर संतुष्ट रह कर, मृग की तरह विश्वस्त होकर विहार करता हूँ।
यह देखकर ही मेरे मुँह से उदान निकल पडे-
"अहो सुखं, अहो सुखं। "
नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
Ref: उदान: भद्दिय सुत्त
01.08.2023


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