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टेकेपार उपसा सिंचाई का पानी धान की खेती को देने के लिए किसानों ने की माँग,आंदोलन की दी चेतावनी


चित्रा न्युज प्रतिनिधी 
भंंडारा :-इस वर्ष जून 2026 में बारिश का पानी  नहीं के बराबर गिरने के कारण धान उत्पादक किसानों की धान की बुवाई 100% नहीं हो पाई, फिर भी अधिकांश किसानों ने धान की बुवाई की। अब मध्य में थोड़ी बारिश की फुहारें आने से बीज अंकुरित तो हुए, परंतु पानी न होने के कारण अधिकांश धान के पौधे मुरझाकर मरने लगे हैं।

टेकेपार उपसा सिंचाई क्षेत्र से वैनगंगा नदी बहती है और उपसिंचन के कारण यहाँ के किसान 140 से 145 दिन की अवधि वाले धान के पौधे टंकी में रखते हैं। लगभग 1 महीने से पानी न होने के कारण 140 से 145 दिनों में से 30 दिन बर्बाद हो गए हैं। बचे हुए 110 दिनों में भी यदि पर्याप्त पानी नहीं मिला तो लोगों की नजर टेकेपार उपसा सिंचाई पर टिकी है।

परंतु वहाँ के अधिकारियों ने 31 अगस्त तक पानी नहीं छोड़ने की बात कहकर शासन का परिपत्रक दिखाया, जिसके कारण धान उत्पादक किसानों ने उपसा सिंचाई का पानी छोड़ने की विनती की। यदि पानी नहीं छोड़ा गया तो धान उत्पादक किसानों पर भुखमरी की नौबत आने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। धान उत्पादक किसानों से ग्रामीण रोजगार जुड़ा हुआ है, वह भी ठप हो जाएगा। इस कारण ग्रामीण क्षेत्र में बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए 17 से 18 गांवों के किसानों ने टेकेपार उपसा सिंचाई को अर्जी देकर तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी है।


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