[वेरञ्जा- एक बौद्ध स्थल]
"तेन समयेन भगवा वेरञ्जायं विहरति "- विनयपिटक
एक समय भगवान बुद्ध वेरञ्जा में नलेरूपुचिमन्दमूल ( नीम का पेड ) स्थान में विहार कर रहे थे। उस समय वेरञ्ज ब्राह्मण भगवान के दर्शन करने गया और भगवान से वार्तालाप किया था।
बुद्धकालीन युग में वेरञ्जा नाम से सुप्रसिद्ध बौद्ध स्थान वर्तमान में अचलपुर नाम से जाना जाता है।
उत्तर प्रदेेश के ऐटा जनपद में वर्तमान ऐटा तहसील के अंतर्गत एक स्थान 'अचलपुर ' स्थान है।
के नाम से जाना जाता है। अचलपुर उत्तर प्रदेश के ऐटा जनपद में सोरों और फरीदाबाद जनपद में संकिसा से कुछ किमी दूर स्थित है। यह तीनों स्थान बुद्धकालीन समय में बुद्ध धम्म के धार्मिक सांस्कृतिक स्थान थे।
वेरञ्जा के प्राचीन ऐतिहासिक खण्डहर काली नदी (प्राचीन इच्क्षुतमति नदी)- जो गंगा की एक शाखा है, के पश्चिमी तट पर स्थित है।
वेरञ्जा का टीला उत्तर प्रदेश में चार सबसे बड़े टीलों में से एक है। इस टीले की लम्बाई 1. 5 किमी और चौड़ाई 0.5 किमी आंकी जा सकती है।
वेरञ्जा का संबंध भगवान बुद्ध के साथ जुड़ा हुआ है। भगवान बुद्ध ने वेरञ्जा में 12वां वर्षावास किया था। यह 12वां वर्षावास बुद्ध के सबसे कठिन वर्षावास था।
अकाल पडने के कारण भिक्खुसंघ को भिक्खा मिलना मुश्किल था। तब संघ चनों एवं जौ को आग में भूनकर ओखल में कूट- पीसकर आधा-आधा लोटा पानी के साथ मिलाकर
उसे पीकर तीन माह पूरे किए थे।
इसी वेरञ्जा में भगवान बुद्ध ने महत्वपूर्ण उपदेश किए। इस उपदेश का वर्णन वेरञ्ज सुत्त में मिलता है। यह सुत्त वेरञ्जा की ऐतिहासिकता को सिद्ध करने वाला सबसे प्राचीन ऐतिहासिक दस्तावेज है।
तथागत ने वेरञ्जा में महत्वपूर्ण उपदेश दिए है, जैसे-
*अस्साजानेय सुत्त
*अस्सीळुङ्क सुत्त
*पहाराद सुत्त आदि।
उन सुत्तो में भगवान बुद्ध के महत्वपूर्ण उपदेश की जानकारी मिलती है।
नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
21.08.2024
0 टिप्पण्या