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प्रधान मंत्री मोदी ना केवल झूठा है बल्कि धोखेबाज और बहानेबाज भी पक्का है ,,,, चेतन बैरवा , एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ।



सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट चेतन बैरवा का मानना है कि भारत का प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ना केवल झूठा है बल्कि यह  धोखेबाज और बहानेबाज भी  है पक्का है । जिसकी कीमत बीजेपी को 2024 के लोक सभा चुनावो में हर हाल में चुकानी पड़ेगी । मोदी पर यह बात शत प्रतिशत फिट बैठती है क्योंकि यह ना केवल झूठ बोलता है बल्कि धोखेबाज और बहाने बाज भी पक्का है । 2014 के लोक सभा चुनाव  प्रचार के दौरान प्रधान मंत्री मोदी ने देश की जनता से वादा किया था कि वह विदेशो में जमा भारतीयों का काला धन इंडिया ले आ लाएगा जो इतना होगा कि हरेक इंडियन के खाते में 15 से 20 लाख रुपए तो यूं ही आ जाएंगे । लेकिन आज दिन तक किसी के खाते में एक रुपया भी नही आया । इससे साबित होता है कि मोदी ने देश की जनता से झूठ बोलकर सत्ता हथियाई थी । मोदी ने यह भी कहा था कि वह प्रधान मंत्री बनेगा तो उसकी सरकार हर साल 2 करोड़ नोकरिया युवा बेरोजगारों को उपलब्ध कराएगी । तो नौकरियां उपलब्ध कराना तो दूर की बात रही बल्कि जो नोकरियां पहले से उपलब्ध थी वो और  निजीकरण के कारण गायब हो गई । मोदी ने अंधाधुंध निजीकरण इसलिए किया ताकि एससी , एसटी , ओबीसी के लोगो को आरक्षण से मिलने वाली नौकरियां ना मिले और वो पहले कि तरह गरीब बन जाए । ज्ञात हो कि संविधान में प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है जो की होना चाहिए । यह आदमी एक नंबर का धोखेबाज भी है। इसने पता नही कितनों को धोखा दिया है जिसमे इसका राजनीतिक गुरु लाल कृष्ण आडवाणी भी एक है। राम मंदिर आंदोलन चलाकर बीजेपी को 2 से 200 के पार पहुंचाया आडवाणी ने और फायदा उठाया इसने प्रधान मंत्री बनकर । इससे साबित होता है कि मोदी एक नंबर का धोखेबाज भी है । हालांकि मैं राम मंदिर आंदोलन को भी उचित नही मानता क्योंकि इससे भारत में रहने वाले 20 करोड़  मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। किसी के धार्मिक स्थल को गैर कानूनी तरीके से गिराना ठीक बात नही । कांग्रेस की लापरवाही के कारण बाबरी मस्जिद गिरी है । पाकिस्तान में यदि हिंदुओ के मंदिर गैर कानूनी तरीके से गिराए जाते हैं तो मैं उसे भी ठीक नही मानता । मोदी एक नंबर का बहाने बाज भी है जिसके एक नही सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं । हाल ही में इसकी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले को , एक अध्यादेश के जरिए पलट दिया जिसमे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि भारत के चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति बिना भारत के मुख्य न्यायाधीश की सहमति के नही की जाएगी । इससे साफ जाहिर होता है कि मोदी का डेमोक्रेसी में कोई विस्वास नही है और यह डेमोक्रेसी में विश्वास होने का केवल बहाना  करता है । मोदी सरकार भारत को हिंदू राष्ट्र बनाकर देश में फिर से वर्ण व्यवस्था लागू करना चाहती है जो ना देश के 52 प्रतिशत ओबीसी के लोगो को , ना 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लोगो को और ना 12 प्रतिशत अनु जन जाती के लोगो को स्वीकार है  । कुल मिलाकर इससे देश में अफरा तफरी ही मचेगी , देश में ग्रह युद्ध की स्तिथि ही बनेगी । देश एक बड़ी समस्या में फस जाएगा जो इतनी बड़ी होगी कि देश के टुकड़े हो जाए तो कोई ताजुब्ब की बात नही होगी ।  

चेतन बैरवा , एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट , मो 85 11 31 63 41 , 14 अगस्त 2023 , फेस बुक

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