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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻 

   [दासी खुज्जुत्तरा]

भिक्षुओ, ये जो मेरी बहुश्रुत श्राविकाएं हैं, उपासिकाएं हैं, खुज्जुत्तरा उनमें अग्र है।
            -  तथागत बुद्ध 


कौशांबी के शेठ घोषित की धाय की पुत्री का नाम था उत्तरा। नाम था उत्तरा, पर कुबडी होने के कारण लोग उसे खुज्जुत्तरा कहते थे, यानी कुब्जा उत्तरा कहलाती थी।

बड़ी होकर खुज्जुत्तरा कौशांबी की रानी श्यामावती की दासी हुई। वह प्रतिदिन रानी के लिए बाजार से फूल खरीदने जाती थी। रानी उसे फूलों के लिए आठ मुद्राएं दिया करती थी, जिनमें से चार वह फूल खरीदने में लगा देती और बाकी चार अपने लिए बचा लेती थी।

एक बार जब वह फूल खरीदने गयी तब उसने नगर में भगवान बुद्ध का उपदेश सुना। सुनते- सुनते ही उदय - व्यय और निरोध का साक्षात्कार कर स्त्रोतापत्ति  फल  प्राप्त कर लिया। अब खुज्जुत्तरा बिल्कुल बदल गयी।
वह अपनी मालकिन के लिए सभी आठ मुद्राओं के फूल खरीद कर ले गयी। इतने सारे फूल देख कर रानी श्यामावती ने कारण पूछा। खुज्जुत्तरा ने सारी स्थिति सही-सही कह सुनायी। 
श्यामावती ने खुज्जुत्तरा के मुँह से तथागत का उपदेश सुना। रानी बहुत प्रभावित हुई। अब खुज्जुत्तरा रोज भगवान से उपदेश सुन कर आती और श्यामावती तथा रनिवास की अन्य नारियों के सामने उसे दोहरा देती। 

रानी श्यामाावती खुज्जुत्तरा के मुँह से भगवान के उपदेश सुन - सुन कर बहुत आल्हादित होती थी। वह खुज्जुत्तरा से भगवान का उपदेश सुनती, तब खुज्जुत्तरा को ऊंचे आसन पर बिठा कर रानी स्वयं नीचा आसन लेकर बैठती थी। खुज्जुत्तरा के प्रति रानी श्यामावती की श्रद्धा बढ़ने लगी। 

उसने खुज्जुत्तरा को दासी के बंधन से मुक्त किया और अपनी सगी मां की भांति पूज्य मानने लगी, खुज्जुत्तरा ने श्यामावती को सद्धर्म में नया जन्म जो दिया था।

खुज्जुत्तरा भगवान की प्रमुख गृहस्थ शिष्याओं में से एक हुई।

नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼 
14.08.2023

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