भीम प्रकाश बौद्ध उप संपादक मध्य प्रदेश मो 9754 84 3705
देश के कई स्कूलों में स्वच्छ पानी शौचालय व सतत बिजली आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है ।कई स्कूल ऐसे हैं। जहां बच्चों की बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं स्कूलों में समस्या का अंबर लगा हुआ है। ऐसे में बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा बेमानी साबित होगी। क्योंकि खाने के लिए रोटी नहीं है। दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से जुटा पाता है। किसान क्या अपने बच्चों को शिक्षा दिला पाएगा स्कूलों में बेहतर से बेहतर सुविधा हो सभी बच्चे शिक्षा के प्रति को जागरुक होना होगा भारत के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों शिक्षा संस्थान की बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं कर पाते हैं । विडंबना यह है
कि भवन परिसर बेहतर संसाधन और स्कूलों की संख्या बढ़ाने के नाम पर हर साल बड़ी धनराशि आवंटित की जाती है।।पर अब तक शून्य है। दूसरी ओर स्कूलों में बच्चों को पढ़ने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं । टीचर सुदूर इलाकों में कई स्कूल ऐसे हैं जो वित्त पोषण और संसाधन हीनता के चलते बंद होने के कगार पर हैं। स्कूलों की तरफ कोई ध्यान देने वाला नहीं है। लगातार घटती अनुपस्थित शिक्षकों को समय पर स्कूल न पहुंचना यह चिंता पैदा करती है। कि आखिर हमारे देश का भविष्य की बच्चों का क्या होगा क्योंकि उनको शिक्षा नहीं दी जा रही है। स्कूलों में टीचर अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर रहे हैं जब मन हुआ तब स्कूल आ जाते हैं नहीं हुआ तो नहीं आते हैं इस प्रकार कानून की धज्जियां बनाई जा रही है शासन प्रशासन से कोई नहीं डर रहा है कानून को खूंटी पर टांग दिया है 2008 में देश के सभी बच्चों को 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है मौलिक अधिकार दिया गया था भारतीय संविधान में अधिकतर बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं इसके लिए स्कूलों की बुनियादी ढांचे कुछ सुधारना उन्हें जरूरी सुविधा उपलब्ध कराना बिजली पानी बहुत बड़ी समस्या है समूची शिक्षा व्यवस्था के लिए एक नियम होना चाहिए तमाम चुनौतियों से निकलने के अलावा शिक्षण संस्थानों में रक्त पड़े पदों को भरना होगा तभी सरकार का सपना पूरा हो सकता है सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे जिस की शिक्षा परिवर्तन में बदलाव होने की व्यवस्था होना चाहिए तभी शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन होगा


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