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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻
 
[ ऐसे भिक्खु पर विश्वास करना अनुचित है। ]

एक समय महामोग्गल्लान  भर्ग जनपद में, सुंसुमार गिरि  के भेषकलावन  में विहार  करते थे ।वहां महामोग्गल्लान  ने भिक्खुओं को सम्बोधित  करते हुए  कहा-

आवुस, भिक्खुओ! 
भिक्खु बदनीयत हो, बुरी  इच्छाओं के वशीभूत  होता है वह दुर्वचन  पैदा करता है।  ऐसा भिक्खु अपनी उन्नति या प्रशंसा  चाहने वाला होता है और  दूसरे की निन्दा  चाहने  वाला होता है।  
- वह भिक्खु क्रोधी  होता है, क्रोध से वशीभूत  होता है।
- वह भिक्खु क्रोधी  होता है, क्रोध के हेतु डाह युक्त  होता है।
-वह भिक्खु क्रोधी होता है,
 क्रोध की वाणी निकालने वाला होता है।
- भिक्खु दोष दिखलाने  पर दोष दिखलाने वाले के लिए  प्रतिघात  करता है।
-भिक्खु दोष दिखलाने से,  दोष दिखलाने वाले को नाराज करता है।

- भिक्खु दोष दिखलाने से,  दोष दिखलाने वाले  पर उल्टा आरोप करता है।
-भिक्खु दोष दिखलाने पर,  दोष दिखलाने वाले  के साथ दूसरी- दूसरी बात ले लेता है। मूल बात को छोड़कर  दूसरी बात करता है, क्रोध,  द्वेष , नाराजगी  उत्पन्न  करता है।
- भिक्खु दोष दिखलाने पर,दोष दिखलानेवाले का साथ छोड देता है।
वह भिक्खु निष्ठुर, ईर्षालु और  मत्सरी होता है।
वह मायावी और  शठ होता है।  वह जड़ और अभिमानी होता है। 
वह तुरन्त  लाभ चाहनेवाला  और  हठी होता है।
ऐसे भिक्खु पर विश्वास करना अनुचित है।  

नमो बुद्धाय🙏🙏🙏 
Ref: अनुमान सुत्त: मज्झिम निकाय 
09.07.2024

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