आरटीआई से हैरान कराने वाला खुलासा , गायब हो गए 88 हजार करोड रुपये से ज्यादा के नए नोट
भवन लिल्हारे उपसंपादक ( चित्रा न्युज महाराष्ट्र राज्य ) मो.नं.9373472847
दिल्ली : नामुमकिन मुमकिन है- 2019 चुनाव में मोदी जी का नारा था। जाहिर है, सकारात्मक अर्थों में था। पर यह नकारात्मक अर्थों में भी संभव हुआ है। सच कहिये तो नकारात्मक अर्थों में ही हुआ है सकारत्मक अर्थों में अडानी और ब्रजभूषण सिंह को कम से कम गिरफ्तार तो होना ही चाहिए था। भले जमानत पर छूट जाते, अर्नब गोस्वामी की तरह या उससे भी कम समय में। ब्रजभूषण सिंह के खिलाफ आरोप की पुष्टि नहीं होती तो बात अलग थी, आरोप वापस लेना तो चीख-चीख कर सच बता रहा है।
ऐसी व्यवस्था में सुबह एक ट्वीट से पता चला और बाद में पुष्टि हुई कि यह फ्री प्रेस जर्नल में धर्मेश ठाकुर की बाईलाइन से छपी खबर है। और इस खबर के अनुसार यह आरटीआई से मिली सूचना है कि नासिक के करेंसी नोट प्रेस से 500 के 375.450 मिलियन नोट छपे हैं पर भारतीय रिजर्व बैंक को सिर्फ 345.000 मिलियन नोट मिले हैं। यह अप्रैल 2015 से दिसंबर 2016 के बीच की कहानी है।
500 के लापता नोट का मूल्य 88032.5 करोड़ रुपये है। ये 1760.65 मिलियन नोट हैं और इनके बारे में कोई नहीं जानता है तथा ये रहस्यमयी ढंग से लापता है। इस खबर की पुष्टि करने की कोशिश में पता चला कि 500 के दो तरह के नोट बाजार में हैं। अमूमन एक को नकली एवं दूसरे को असली कहा जाता है पर अब नामुमकिन मुमकिन है और दोनों ही असली है। मोटा मोटी मामला यह है कि सरकार के 88 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा गायब हैं और 100 करोड़ के लिए या उससे भी कम के लिए जनसेवा के काम करने वाला मंत्री जेल में है। बाकी मंत्रियों के मामले में तो घोटले की राशि इतनी भी नहीं है।
पांच सौ के दो तरह के नोट बाजार में होने की पुष्टि पीआईबी की विज्ञप्ति से हुई है और दोनों नोटों के असली होने की पुष्टि करने के बाद आपको बता दूं कि मेरे पास दोनों तरह के नोट हैं। घुल-मिल कर चल रहे हैं। एक ही बार में एटीएम से दोनों निकले हैं और कहने के लिए तो मैं कह ही सकता हूं, भले कोई न माने और मनी लांडरिंग का केस बन जाए पर सच यही है कि अपने पास 500 के नोट तो बैंक से ही आते हैं। 2000 के नोट प्रचलन में थे तो कम के भुगतान पर कुछ पांच सौ के नोट होते थे जो कहां से आए पता नहीं रहता था।
अब तो ऐसी कोई संभावना नहीं है। इसलिए मैं मान ले रहा हूं कि दोनों नोट असली है और पीआईबी की विज्ञप्ति भी सही है। वरना इन दिनों फर्जीवाड़े की, नकली होने की कोई सीमा ही नहीं है। कुछ भी नकली हो सकता है और नकली को असली तथा असली को नकली साबित भी किया जा सकता है। यह भले मुश्किल हो पर असंभव नहीं रह गया है।
खास बात यह है कि लापता नोट नए डिजाइन वाले हैं और एक तरह का नोट बाजार में रहते दूसरी तरह के नोट क्यों छपवाये गए और छपवाये गए तो उनमें से कुछ गायब क्यों और कैसे हो गये? कैसे यकीन किया जाए कि यह योजनाबद्ध नहीं है और है भी तो आप क्या कर सकते हैं। 56 ईंची वाली सरकार बोलती है नहीं, मन की बात में बोलें यह जरूरी नहीं है।
फिर भी उम्मीद है कि यह मजाक नहीं होगा पर मजाक जैसा तो है ही। कहने की जरूरत नहीं है कि पहली बार सरकार के काम इतने ढीले-ढाले और हास्यास्पद लग रहे हैं। अव्वल तो बहुमत से चुने जाने वाले किसी नेता के घर में आग लगा दिये जाने का कोई मतलब नहीं था पर अब तो मंत्री के घर में लगा दी गई है। और पुलिसिया ताकत रखी रह गई। यह भी नामुमकिन का मुमकिन होना ही है पता नहीं इसे सकारात्मक मानूं या नकारात्मक। जो भी हो, जिस मंत्री जी का घर जला है वो कह रहे हैं कि भ्रष्ट नहीं हैं पर नैतिक भ्रष्टाचार भी कुछ होता है। मान लीजिये और शर्म कीजिये।
500 के दो तरह के नोट। हरी पट्टी की जगह देखिये - एक में गांधी जी की फोटो के पास है और दूसरे में गवरनर के दस्तखत की तरफ। उम्मीद है नोट की फोटो सार्वजनिक करना या गलती बताना गैर कानूनी नहीं है।
संजय कुमार सिंघ


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