[ अविगतपच्चयो ति ]
चत्तारो खन्धा अरूपिनो अञ्ञमञ्ञं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
चत्तारो महाभूता अञ्ञमञ्ञं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
ओक्कन्तिक्खणे नामरूपं अञ्ञमञ्ञं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
चित्तचेतसिका धम्मा चित्तसमुट्ठानानं रूपानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
महाभूता उपादारूपानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
चक्खायतनं चक्खुविञाञाणधातुया तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
सोतायतनं सोतविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
धानायतनं धानविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
जिह्वायतनं जिह्वाविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
कायायतनं कायविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
रूपायतनं चक्खुविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
सद्दायतनं सोतविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
गन्धायतनं धानविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
रसायतनं जिह्वाविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
फोट्ठब्बायतनं कायविञ्ञाणधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
रूपायतनं सद्दायतनं गन्धायतनं रसायतनं फोट्ठब्बायतनं मनोधातुया
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो।
यं रूपं निस्साय मनोधातु च मनोविञ्ञाणधातु च वत्तन्ति, तं रूपं मनोधातुया च मनोविञ्ञाणधातुया च
तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं अविगतपच्चयेन पच्चयो ति।
अविगत प्रत्यय:
चारों अरूपी स्कंध एक दूसरे के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
चारों महाभूत एक दूसरे के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
प्रतिसंधि के क्षण में नाम और रूप एक दूसरे के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
चित्त चैतसिक धर्म चित्त से उत्पन्न होने वाले रूपों के साथ
अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
महाभूत उद्भूत रूपों के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
चक्षु आयतन चक्षुविज्ञानधातु और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
श्रोत्र आयतन श्रोत्रविज्ञानधातु और उससे संयुक्त धर्मो
के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
ध्राण आयतन
ध्राणविज्ञानधातु और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
जिह्वा आयतन जिह्वाविज्ञानधातु और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
काय आयतन कायविज्ञानधातु
और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
रूप आयतन चक्षुविज्ञानधातु
और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
शब्द आयतन श्रोत्रविज्ञानधातु
और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
गंध आयतन ध्राणविज्ञानधातु
और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
रस आयतन जिह्वाविज्ञानधातु
और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
स्प्रष्टव्य आयतन कायविज्ञानधातु और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
रूप आयतन, शब्द आयतन, गंध आयतन, रस आयतन और स्प्रष्टव्य आयतन मनोधातु
और उससे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
जिस रूप के आश्रय से मनोधातु और मनोविज्ञानधातु स्थित होते हैं, वह रूप मनोधातु और मनोविज्ञानधातु और उनसे संयुक्त धर्मो के साथ अविगत प्रत्यय से संबद्ध होते हैं।
नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼
Ref: तिकपट्ठान
13.07.2023


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