प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस नीति के कारण विकसित देश अपने विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में सफल तो हुए लेकिन दुनिया के पर्यावरण को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। श्री मोदी ने कहा, दशकों तक विकसित देशों के इस तरीके पर किसी को आपत्ति नहीं थी लेकिन अब भारत ने इन सभी देशों के साथ जलवायु न्याय का प्रश्न उठाना शुरू कर दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने विकास के लिए किसी अन्य क्षेत्र की तरह ही बड़े पैमाने पर पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले नौ वर्षों में हरित और स्वच्छ ऊर्जा पर बल दिया है। श्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के स्पष्ट रोडमैप के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने हरित हाइड्रोजन मिशन, प्राकृतिक खेती और हरित अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने सहित अन्य पहलों का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा, एक तरफ जहां भारत ने अपने 4जी और 5जी नेटवर्क का विस्तार किया है, वहीं अपने वन क्षेत्र को भी बढ़ाया है।
इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि धरती पर रहने के लिए पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने बाघ, शेर और चीता जैसी बड़ी बिल्लियों के संरक्षण और सुरक्षा के साथ-साथ उनके जैव विविधता क्षेत्रों के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की शुरुआत की है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने प्लास्टिक की वस्तुओं के एकल उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
आयोजन के दौरान, अमृत धरोहर कार्यान्वयन रणनीति और मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटैट्स एंड टैंजिबल इनकम का शुभारंभ किया गया।


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