चेतन बैरवा , एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट
ये हिंदू धर्म है , देखलो इस हिंदू धर्म को , यहां जीते जी तो आपस में एक दूसरे से नफरत की ही जाती है लेकिन मरने के बाद भी की जाती है । ये नफरत एससी , एसटी , ओबीसी के साथ पहले तीन वर्ण के लोगो द्वारा , किसी से कम और किसी से ज्यादा की जाती है। नफरत करने की यह व्यवस्था बाकायदा लिखित में हैं , विश्वास नही तो मनु स्मृति पढ़कर देख लो , राम चरित मानस की उस चौपाई को पढ़कर देख लो जो कहती है कि ढोल गंवार शूद्र पशु नारी ये सब ताडन के अधिकारी । मजे की बात यह है कि नफरत करने वाले पहले तीन वर्ण के लोग आपस में भी एक दूसरे से नफरत करते हैं। ब्राह्मण कहता है कि में क्षत्रियों और वैश्यों से ऊंचा , जबकि क्षत्रिय कहता है कि में ब्राह्मण से तो ऊंचा नहीं लेकिन वैश्य से ऊंचा जरूर हूं । पूरा हिंदू समाज जातिगत नफरतों से भरा हुआ है। ऊपर से हिंदू धर्म के ठेकेदार ,आर एस एस और बीजेपी के लोग इस व्यवस्था को संस्कृति मानते है और इसे बनाए रखने की कसमें खाते है । मोदी सरकार 2014 से यही तो कर रही है । ऊडीसा के एक गांव में कोई एससी का आदमी मर गया , घर के बच्चे ने पड़ोसियों से कहा कि मेरे मृत बाप को शमशान तक तो ले चलो , पड़ोसियों ने बच्चे को यह कहकर मदद करने से इंकार कर दिया कि तुम दलित हो । हम तुम्हारे मृत बाप को शमशान तक नही ले चल सकते । तो ऐसा तो ये हिंदू धर्म है । फिर कहते हैं कि इंडिया में इस्लाम क्यों फलफूल रहा है । में कहता हूं की इन हालात में इस्लाम फलेगा - फूलेगा नही तो और क्या होगा । जयपुर एक बड़ा शहर है , राजस्थान की राजधानी भी है , यहां चांदपोल नाम की बड़ी जगह है , वहां कई वर्ग किलो मीटर के दायरे में हिंदुओ के शमशान बने हुए हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि यहां हरेक जाती का अलग अलग शमशान बना हुआ जिन पर हरेक जाती के बड़े बड़े साइन बोर्ड लगे हुए हैं । जिन पर यह लिख हुआ है कि यह इस जाती का शमशान है , यह उस जाति का शमशान है । और ये शमशान जयपुर नगर निगम द्वारा संचालित हैं , और जयपुर नगर निगम भारतीय संविधान के आर्टिकल 12 के तहत स्टेट की परिभाषा में आता है । और संविधान का आर्टिकल 14 और 15 यह कहता है कि जाती और धर्म के आधार पर कोई भेद भाव नहीं किया जाएगा । आर्टिकल 14 साफ कहता है कि " State shall not deny to any person equality before law " . इसी तरह आर्टिकल 15 कहता है कि " State shall not discriminate against any citizen , on grounds of religion , race , caste , sex , place of birth etc. " ,,,, सोचता हूं कि इस विषय पर भी एक PIL सुप्रीम कोर्ट में लगा दूं और इस भेदभाव को खत्म करवा दूं ।
चेतन बैरवा , एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट , मो 85 11 31 63 41 , 20 जून 2023 , फेस बुक


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