[ धम्मोपदेशक के गुण ]
एक समय तथागत श्रावस्ती के जेतवन विहार में विहार करते थे तब कोई भिक्खु जहां भगवान थे वहां आया और भगवान का अभिवादन कर एक ओर बैठ गया।
एक ओर बैठ, वह भिक्खु भगवान से बोला -
भन्ते ! लोग 'धम्म कथिक, धम्म कथिक' कहा करते हैं। सो 'धम्म कथिक' के क्या गुण हैं ?
भिक्खु ! जो जरा मरण के निर्वेद=विराग=निरोध का उपदेश करता हैं वही अलबत्ता धम्म कथिक कहा जा सकता हैं ।
भिक्खु ! जो जरा मरण के निर्वेद हो जाने से विमुक्त हो गया हैं, वह अलबत्ता देखते ही देखते निर्वाण पा लेनेवाला भिक्खु कहा जा सकता हैं ।
भिक्खु ! जो जाति, भव, उपादान, तृष्णा, वेदना,स्पर्श, षडायतन,नाम-रूप,विज्ञान, संस्कार, अविद्या के हेतु और उनके निरोध का उपदेश करता हैं, वही अलबत्ता धम्म कथिक कहा जा सकता हैं ।
भिक्खु ! जो अविद्या के निरोध के लिए प्रतिपन्न हैं, वही अलबत्ता 'धम्मानुधम्म प्रतिपन्न' कहा जा सकता हैं ।"
नमो बुद्धाय 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Ref : धम्म कथिक सुत्त- संयुक्त निकाय
26.07.2023


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