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🌻धम्मप्रभात🌻

🌻धम्मप्रभात🌻

[जहां शीलवान भिक्षु रहते हैं, वहां श्रद्धालु गृहस्थ को तीन लाभ प्राप्त होते है।] 

तथागत ने कहा  -
भिक्षुओं, "जिस गाँव या निगम के आश्रय में शीलवान भिक्षु रहते हैं, वहाँ के रहने वाले श्रद्धालु गृहस्थ तीन तरह से बहुत पुण्य कमाते है या कमा सकते हैं ।" 

"कौन से तीन तरह से ?" 

"काया से, वाणी से तथा मन से !" 

"तीन तरह से किस प्रकार ?" 

"आदर और श्रद्धा युक्त चित्त से, प्रसन्नता से भिक्षु को वंदन कर के श्रद्धालु गृहस्थ बहुत पुण्य कमाते है या कमा सकते हैं ।" 

"आदर और श्रद्धा युक्त चित्त से, प्रसन्नता से भिक्षु को भोजनदान तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान कर के, आवश्यकतानुसार सेवा तथा व्यवस्था करके श्रद्धालु गृहस्थ बहुत पुण्य कमाते है या कमा सकते हैं ।"
"आदर और श्रद्धा युक्त चित्त से, प्रसन्नता से भिक्षु से धर्म श्रवण कर, धर्म सिखकर अपने निर्वाण का मार्ग प्रशस्त कर के श्रद्धालु गृहस्थ बहुत पुण्य कमाते है या कमा सकते हैं ।" 

इस प्रकार भिक्षुओं, "जिस गाँव या निगम के आश्रय में शीलवान भिक्षु रहते हैं, वहाँ के रहने वाले श्रद्धालु गृहस्थ तीन तरह से बहुत पुण्य कमाते है या कमा सकते हैं ।" 

नमो बुद्धाय🙏🙏🙏 
Ref: अंगुत्तर निकाय
04.01.2024

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