Ticker

6/recent/ticker-posts

🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻 

[तिकपट्ठान की दूसरी कडी]

[ आरम्मणपच्चयो ति ]

रूपायतनं चक्खुविञ्ञाणधातुया तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं आरम्मणपच्चयेन पच्चयो ।
सद्दायतनं सोतविञ्ञाणधातुया.. .
गन्धायतनं धानविञ्ञाणधातुया...
 रसायतनं जिव्हाविञ्ञाणधातुया ...
फोट्ठब्बायतनं कायविञ्ञाणधातुया...
रूपायतनं सद्धायतनं गन्धायतनं  रसायतनं फोट्ठब्बायतनं  मनोधातुया तंसम्पयुत्तकानं च धम्मानं आरम्मणपच्चयेन पच्चयो। सब्बे धम्मा मनोविञ्ञाणधातुया  तंसम्पयुत्तकानं  च धम्मानं आरम्मणपच्चयेन पच्चयो। 
यं यं धम्मं आरब्भ ये ये धम्मा उप्पज्जन्ति चित्तचेतसिका धम्मा, ते ते धम्मा तेसं तेसं धम्मानं आरम्मणपच्चयेन पच्चयो। 

-आलंबन प्रत्यय:
'आरम्ण' का अर्थ है आलंबन। अर्थात,  कोई सहारा होना चाहिए।  अमुक बात अमुक सहारे से उत्पन्न होती है। 
इस आलंबन से क्या उत्पन्न होता है-
रूपायतनं  आदि षडायतन है। ये छ: आयतन आंख,नाक,कान,जीभ, त्वचा  और  मन।  ये सब हमारे शरीर के भीतर है। और  दूसरे छ: जो जो इनके विषय हैं- रूप, गंध, शब्द, रस, स्पर्श  इत्यादि- वे शरीर  की सीमा के बाहर हैं। बाहर के आलंबन  को कहते हैं -' रूप आयतन'। 
 कोई  रूप, आकृति, मैटर  दिखाई देने पर उसकी वजह से जागता है' चक्षुविज्ञान '। 
कुछ सामने दिखने  के लिए  हो ही नहीं,कोई  प्रकाश भी न हो, तो चक्षुविज्ञान  नहीं जाग सकता। उस चक्षुविज्ञान  से, उस विज्ञान  के साथ-साथ  और  विज्ञान  के जो अंग हैं- माने मन  पर उत्पन्न होने वाले- संज्ञा, वेदना,  संस्कार इत्यादि।  वे सारे के सारे उस आलंबन से जागेंगे, रूप के आलंबन से जागेंगे।
ऐसे ही शब्द के आलंबन से सुनने का विज्ञान जागता है,श्रोत्र विज्ञान  जागता है। ऐसे गंध के आलंबन से ध्राण का, सूंघने का विज्ञान  जागता है। ऐसे रस के आलंबन से जिह्वा का विज्ञान  जागता है। ऐसे ही फोट्ठब्ब  होने से ,स्पर्श होने से , काया का विज्ञान  जागता है। और ऐसे ही ये रूप, शब्द, गंध, रस  स्पर्श हैं, इनका मन से संपर्क हुआ  तो मनोधातु, तो मन से संयुक्त  होकर जो धर्म  जागे,वे इन्हीं में से जागने लगते है- इन पांचो में से किसी-न-किसी को आलंबन  बना कर।  आंख से, कान से, नाक से, जिह्वा से, त्वचा से , यह सारे अनुभव होकर  हमारे पर उसकी छाप  पडती है तब मन उनका चिंतन करता है,इससे वे आलंबन  हो जाते है। 
सब्बे धम्मा मनोविञ्ञाणधातुया... और  उस चित्त  पर जागे हुए  आलंबन  से और  जितने धर्म  आगे बढने शुरू होते है।
यं यं धम्मं आरब्भ  ये ये धम्मा उप्पज्जन्ति....
 जिन जिन धर्मों के संबंध जिन जिन धर्मो को लेकर जो जो धर्म उत्पन्न  होते है,वे सारे के सारे उन धर्मों  के आलंबन से जागते है।

नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼 
Ref: तिकपट्ठान सुत्त 
24.02.2024
Camp: Kushinagar (U P)

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या