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समाज मैं शिक्षा के प्रति सभी को जागरूक किया जाए

भीम प्रकाश बौद्ध उप संपादक मध्य प्रदेश मो 9754 84 3705 

 भिंड :-आज हमारे देश में शिक्षा के प्रति कोई जागरूक नहीं है शिक्षा के प्रति सभी को जागरूक करना होगा तभी समाज में बदलाव आ सकता है क्योंकि हमारे समाज में 21वीं सदी में भी हम शिक्षा के प्रति लापरवाह है सरकार को चाहिए की शिक्षा को सीमित है सीमित हो जिससे गरीब से गरीब शिक्षा हासिल करें और शिक्षा पद्धति में सुधार की आवश्यकता है आजादी के समय साक्षरता दर गैर सरकारी वह एवं सरकारी प्रयासों के बावजूद भी शिक्षा के प्रति साक्षरता दर अधूरा है शिक्षा के प्रति आज भी हम जागरूक नहीं हो पाए हैं जितना हमें जरूरत है उतना हम शायद शिक्षा को हासिल नहीं कर पाए निरक्षरता होना यह सबसे बड़ा अभिशाप है और उद्देश्य पूर्ण जीवन जीने के लिए व्यक्ति को साक्षर होना अति आवश्यक है साक्षरता के अभाव में व्यक्ति अच्छा और बुरा समझ नहीं सकता है क्योंकि यदि वह शिक्षित नहीं हुआ इस तरह वह स्वयं को समाज में स्थापित नहीं कर पाता वह अपने कर्तव्य और अधिकारों के प्रति सचित नहीं रहता है शिक्षा के बिना अपेक्षित जीवन जीने को विवश रहता है क्योंकि शिक्षा के प्रति जागरूक होना समाज और देश को उन्नति की राह पर अग्रसर रखता है इसलिए यह आवश्यक है कि शिक्षा सभी लोगों तक पहुंचे साक्षरता दर के मामले में दिल्ली असम जैसे राज्यों के आंकड़े जहां खुशी प्रदान करते हैं दरअसल शिक्षा गरीबों को क्यों नहीं मिल रही है साक्षात दर में यही बहुत बड़ी कमी है आबादी के हिसाब से देखा जाए स्कूल में चपरासी व शिक्षकों की कमी है शौचालय का अभाव है यही गरीबों की समस्या का प्रमाण है ग्रामीण अंचलों में शिक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है परंपरागत समस्या है जिनकी समाधान के बिना संपूर्ण साक्षरता का लक्ष्य अधूरा है संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को के मुताबिक दुनिया में सबसे ज्यादा अनपढ़ लोग भारत में है  शिक्षा  84% से भी काम है हम गौर से देखें ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की स्थिति समाज में  संतोषजनक नहीं है 1964 में शिक्षा सुधार के लिए गठित कोठारी आयोग ने भी घरेलू उत्पाद के 6 फ़ीसदी हिस्से को शिक्षा पर ब्याह की सिफारिश की सरकारी शिक्षा में निवेश को लेकर गंभीर नहीं है संयुक्त राष्ट्र ने अगले 10 साल में पूरी दुनिया से सभी क्षेत्रों में लैंगिक  भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लिया है भारत में पिछले 30 सालों में शिक्षा दर मैं बहुत कमी आई है बालकों की शिक्षा के प्रति आज भी समाज का एक हिस्सा जागरूक नहीं हुआ है आज ग्रामीण समाज में अभिभावक बालिका शिक्षा पर पर्याप्त जोर नहीं देते हैं इसी का परिणाम है की बेटियां दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा भी ढंग से पास नहीं कर पाती और छोटी उम्र में ही उनकी शादी कर दी जाती है रूढ़िवादी सोच के कारण लोग बेटियों की शिक्षा को महत्व नहीं देते हैं इसलिए साक्षरता की प्रसार के साथ महिलाओं पुरुषों के बीच साक्षरता के लैंगिक अंतर को पटना भी अति आवश्यक है यह अंतर जितना काम होगा सामाजिक तौर पर उतना ही मजबूत बनेगा बालिका शिक्षा में निवेश सी केबल समुदाय बल्कि देश दुनिया का नक्शा बदल सकता है इससे बाल विवाह की संभावना कम और स्वस्थ जीवन जीने की संभावना अधिक हो जाती है उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं क्योंकि हमारे समाज में पुरानी परंपरा और रूढ़ियों को और अंधविश्वास को  बढ़ावा दिया जाता है जब तक हमारा समाज इन पुरानी रूढ़ियों से नहीं हटेगा जब तक हम शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक हम कैसे कह सकते हैं कि हम शिक्षित हैं आज भी कई जगह गौर से देखा जाए शिक्षा इतनी महंगी है कि उसे गरीब से गरीब व्यक्ति तक बहुत दूर है

सरकार को चाहिए की शिक्षा को सस्ती से सस्ती करें जिसमें गरीब से गरीब व्यक्ति शिक्षा प्राप्त कर सके महंगी शिक्षा पर रोक लगे क्योंकि महंगी शिक्षा होने से गरीब व्यक्ति को से दूर रहता है क्योंकि वह है अपने पेट का भरण पोषण भी बड़ी मुश्किल से कर पता है तो वह पढ़ाई कैसे कर पाएगा यह बहुत ही चिंता का विषय है सरकार तो बस घोषणाओं पर घोषणा करती है इससे कुछ होने वाला नहीं है जब तक एक नया कानून लागू नहीं हो जाता तब तक शिक्षा पद्धति में सुधार की उम्मीद करना बेमानी होगी एक विद्यालय में कितने टीचर होने चाहिए कितने बच्चे होने चाहिए कितनी वेतन होना चाहिए यह सब नियम सरकार को शीघ्र बना लेना चाहिए क्योंकि कई टीचर ऐसे हैं कई कई दिनों तक विद्यालय नहीं जाते हैं और जाते भी हैं तो समय पर नहीं पहुंचते और पूरा वेतन प्राप्त करते हैं इससे बच्चों का भविष्य अंधकार में हो रहा है पूरा पाठ्यक्रम नहीं अधूरा नहीं होना चाहिए जैसे-जैसे कई नियम है जिनमें सुधार होना अति आवश्यक है क्योंकि नियम और अनुशासन कई टीचरों में नहीं है वह तो बस अपना समय पूरा करते हैं की कैसे भी एक या दो घंटे कैसे व्यतीत करें इस प्रकार वह घर जल्दी चले जाते हैं जिससे बच्चों को भविष्य खिलवाड़ हो रहा है वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण नहीं करते हैं एक ही पदों पर एक ही अफसर वर्षों तक एक ही जगह पदस्थ रहता है उसको हटाने की कवायत होना चाहिए जिससे भ्रष्टाचार को ना बढ़ावा मिले यदि सरकार ने समय रहते शिक्षा पद्धति में सुधार की प्रयास नहीं किया तो यह सरकारी पैसा लापरवाह टीचर सरकारी पैसे का दुरुपयोग करते रहेंगे और बच्चों का भविष्य अंधकार में हो जाएगा स्कूल में मध्यान भोजन व्यवस्था शीघ्र बंद होना चाहिए क्योंकि ऐसे सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है क्योंकि किसी भी बच्चे को ठीक तरह से भोजन नहीं दिया जाता है यह तो बस औपचारिकता पूर्ण की जा रही है भोजन के नाम पर टीचर मजे ले रहे हैं पूरा स्टाफ खाने में मस्त हो जाता है इस प्रकार शिक्षा प्राणी पूर्ण तरह से गलत है जब तक शिक्षा को उचित तरीके से गरीबों तक नहीं पहुंच पाएगी तब तक वह शिक्षा बहुत दूर आएंगे गरीबों को मुख्य धारा में लाने के लिए शिक्षा को सम और सस्ती बनाना होगी जिससे कि यह शिक्षा गरीबों के बच्चे स्कूल तक पहुंच पाए यदि सरकार यह प्रयास पूर्ण कर लिए तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश ऊंची बुलंदियों को छूएगा और इस देश का नाम गर्व से ऊंचा हो जाएगा तभी हम कह सकते हैं कि हमारा देश बहुत आगे तरक्की कर रहा है

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