बुद्ध प्रकाश बौद्ध दबोह भिंड मध्य प्रदेश
चंडीगढ :-हाल ही में हुए चंडीगढ़ मेयर पद के चुनाव में सुप्रीम कोर्ट ने अपना न्यायिक फैसला सुना कर एवं उस पर अमल कराकर लोकतंत्र के लिए एक अच्छा संकेत दिया है । दरअसल 30 जनवरी को मेयर पद के चुनाव हेतु मतदान हुआ तो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को 20 मत प्राप्त हुए और भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर को 16 मत मिले। इस गणना के हिसाब से कुलदीप कुमार को विजयी घोषित किया जाना चाहिए था परंतु पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने कुलदीप कुमार को 20 मतों में से 8 मतों को अवैध कर देते हुए भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर को विजयी घोषित कर दिया। इस पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अधिकारी की फैसले को रद्द करने और नए चुनाव कराने की मांग करते हुए जब सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की तो कोर्ट ने जांच करते हुए संबंधित चुनाव अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए उस पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस न्यायिक फैसले का निश्चित ही स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसे फैसले से जनता की अदालत के प्रति विश्वनीयता बढ़ती है। अब ऐसे में यदि आम आदमी पार्टी अपनी दोहरी जीत का जश्न मना रही है तो यह स्वाभाविक ही है परंतु बीजेपी के लिए यह आत्ममंथन करने का समय है कि उसे आखिर एक शहर के मेयर पद के चुनाव में अपनी प्रतिष्ठा को दाँव पर लगाने की क्या आवश्यकता थी। अब स्थिति यह है कि ना तो उसके पास मेयर की कुर्सी है और ना ही यह साबित करने के लिए कोई तर्क है कि चुनाव अधिकारी ने मत पत्रों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की। इस पूरे मामले में अब दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा था कि हम चंडीगढ़ में लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे। इस टिप्पणी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने जो संकेत दिया है वह निश्चित रूप से लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है । चंडीगढ़ के नव निर्वाचित नगर निगम में संख्याबल के हिसाब से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार की जीत पहले ही सुनिश्चित थी ऐसे में चुनाव अधिकारी द्वारा 20 मतों में से 8 मत अवैध घोषित कर भावी विजयी प्रत्याशी को जानबूझकर हराना भाजपा के लिए महंगा साबित हुआ ।
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में कल 36 मत हैं। इनमें 20 मत आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बन रहे थे जबकि इस मोर्चे पर भाजपा 16 मतों के साथ अल्पमत में थी।
चुनाव अधिकारी अनिल मसीह को पीठासीन अधिकारी बनाया गया था जो अतीत में भाजपा के पदाधिकारी रह चुके थे।
वैसे ही आज कांग्रेस सहित विभिन्न दल ईवीएम को हटाकर पूरे देश में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर अड़े हैं ऐसे में यदि ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव होने लगे तो भी भाजपा जैसी पार्टी पर शायद फिर से धांधली के आरोप ना लगे और कोर्ट को बीच में ना आना पड़े ऐसी स्थिति फिर से भाजपा नहीं बनाएगी।


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