भगवान ने कहा-
भिक्खुओ ! अविद्या अकुशल धर्मों (बुराइयों) की पूर्वगामिनी है; निर्लज्जता तथा पाप करने में निडर होना, इसके ठीक पीछे-पीछे आते हैं।
भिक्खुओ!
1) जो अविद्या ग्रसित प्राणी होता है, उसकी मिथ्या दृष्टि होती है।
2) जो मिथ्या दृष्टि वाला होता है, वह मिथ्या संकल्प वाला हो जाता है ।
3) जो मिथ्या संकल्प वाला होता है, वह मिथ्या वाणी वाला हो जाता है।
4) जो मिथ्या वाणी वाला होता है, वह मिथ्या कर्मान्त वाला हो जाता है।
5) जो मिथ्या कर्मान्त वाला होता है, वह मिथ्या आजीविका वाला हो जाता है।
6) जो मिथ्या आजीविका वाला होता है, वह मिथ्या व्यायाम वाला हो जाता है।
7) जो मिथ्या व्यायाम वाला होता है, वह मिथ्या स्मृति वाला हो जाता है।
8) जो मिथ्या स्मृति वाला होता है, वह मिथ्या समाधि वाला हो जाता है।
9) जो मिथ्या समाधि वाला होता है, वह मिथ्या ज्ञान वाला हो जाता है।
10) जो मिथ्या ज्ञान वाला होता है, वह मिथ्या विमुक्ति वाला हो जाता है।
भिक्खुओ! विद्या कुशल धर्मों की पूर्वगामिनी है; लज्जा तथा पापभीरुता इसके पीछे-पीछे आती हैं।
भिक्खुओ !
1) जो विद्या प्राप्त प्राणी होता है, उसकी सम्यक दृष्टि होती है।
2) जो सम्यक दृष्टि वाला होता है वह सम्यक संकल्प वाला हो जाता है ।
3) जो सम्यक संकल्प वाला होता है, वह सम्यक वाणी वाला हो जाता है।
4) जो सम्यक वाणी वाला होता है, वह सम्यक कर्मान्त वाला हो जाता है।
5) जो सम्यक कर्मान्त वाला होता है, वह सम्यक आजीविका वाला हो जाता है।
6) जो सम्यक आजीविका वाला होता है, वह सम्यक व्यायाम वाला हो जाता है।
7) जो सम्यक व्यायाम वाला होता है, वह सम्यक स्मृति वाला हो जाता है।
8) जो सम्यक स्मृति वाला होता है, वह सम्यक समाधि वाला हो जाता है।
9) जो सम्यक समाधि वाला होता है, वह सम्यक ज्ञान वाला हो जाता है।
10) जो सम्यक ज्ञान वाला होता है, वह सम्यक विमुक्ति वाला हो जाता है।
नमो बुद्धाय 🙏🏼🙏🏼🙏🏼
Ref: विज्जा सुत्त:अंगुत्तर निकाय
06.07.2024


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