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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻 

[ दुराचारी के लिए पांच दुष्परिणाम और  सदाचारी के लिए  सदाचार  के कारण पांच सुपरिणाम हैं।]

श्रावस्ती में धम्म सेनापति सारिपुत्त के धातु पर चैत्य बनवा, वहां से निकल कर राजगृह में वास करते, वहां आयुष्मान महामोग्गल्लान का चैत्य बनवा कर,वहां से निकल अम्बलट्ठका में वास कर, चारिका करते हुए भगवान  पाटलिग्राम (वर्तमान  पटना) पहुंचे। उस दिन  पाटलिग्राम वासियों  के द्वारा नगर के बीच में आवासथागार (महाशाला)  तैयार  हो गई थी। पाटलिग्राम वासियों ने सोचा- भगवान हमारे आवसथागार में रूके तो अच्छा। उपासकों ने भगवान से यह कहा- भगवान हमारे आवसथागार को स्वीकार  करें।
भगवान ने मौन से स्वीकार किया।

आवसथागार में बैठे उपासकों को भगवान ने उपदेश देते हुए दुराचारी के लिए पांच दुष्परिणाम बताएं।

भगवान ने कहा-
गृहपतियो! दुराचार के कारण दुस्शील (दुराचारी) के लिए  पांच दुष्परिणाम होते है।

कौन से पांच?

गृहपतियो! 
1) दुराचारी आलस्य करते बहुत से अपने भोगों  को खो देता है।
2) दुराचारी की निंदा होती है।
3) दुराचारी जिस किसी सभा में जाता है प्रतिभारहित, मूक होकर जाता है।
4) दुराचारी मूढ रह मृत्यु को प्राप्त  होता है।
5) दुराचारी आचारभ्रष्ट काया छोड मरने के बाद  दुर्गति पाता है।

भगवान ने आगे कहा-
गृहपतियो! 
सदाचारी के लिए  सदाचार  के कारण  पांच सुपरिणाम  हैं।

कौन  से पांच?

गृहपतियो!

1) सदाचारी अप्रमाद न कर बड़ी  भोगराशि को प्राप्त  करता है।
2) सदाचारी का मंगल यश होता है।
3) जिस किसी सभा में जाता है मूक न हो विशारद बन कर जाता है।
4) मूढ न हो मृत्यु को प्राप्त होता है।
5) सदाचारी को सदाचार के कारण काया छोड़ मरने के बाद सुगति को प्राप्त होता हैं।

नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼 
Ref: महापरिनिब्बान सुत्त:  दीघ निकाय 
17.08.2024

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