दिल्ली(एआईआर):-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि शिक्षा सिर्फ एक बुनियाद नहीं है जिसपर हमारी सभ्यता निर्मित हुई है, बल्कि यह मानवता के भविष्य का वास्तुकार भी है। श्री मोदी ने कहा कि बुनियादी साक्षरता युवाओं के लिए सशक्त नींव बनाती है और भारत इसे प्रौद्योगिकी के साथ जोड रहा है। प्रधानमंत्री आज वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पुणे में जी-20 शिक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि जी 20 के सदस्य देश अपनी-अपनी शक्तियों के साथ अनुसंधान और नवाचार को विशेषकर विकासशील और अल्पविकसित देशों में बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। श्री मोदी ने अनुसंधान सहयोग बढ़ाने के लिए सभी सदस्यों से आग्रह किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी सदस्य देश एक समावेशी, कार्योन्मुख और भविष्य के शिक्षा एजेंडा के साथ आगे आएंगे। उन्होंने 'समझदारी और संख्यात्मकता के साथ पढ़ने में दक्षता के लिए राष्ट्रीय पहल'' या सरकार की निपुण भारत पहल का उल्लेख किया। श्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता की पहचान जी-20 ने भी प्राथमिकता के रूप में की है। प्रधानमंत्री ने समयबद्ध तरीके से 2030 तक इस पर कार्य करने पर बल दिया। श्री मोदी ने नवाचारी तरीके से नयी ई लर्निंग का प्रयोग करने और इसे अनुकूल बनाने की आवश्यकता की बात कही। उन्होंने कहा कि उद्देश्य बेहतर शासन के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दिशा में सरकार द्वारा कई पहल की गई हैं। उन्होंने स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव लर्निंग फोर यंग एस्पायरिंग मांइड्स- स्वयं का जिक्र किया। यह एक ऑनलाइन मंच है जो नौवीं कक्षा से लेकर स्नातकोत्तर के दूर दराज के छात्रों को सभी पाठ्यक्रम पढने की गुणवत्तापूर्ण और सुलभ सुविधा प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि तीन करोड चालीस लाख से अधिक दाखिले और नौ हजार से अधिक पाठ्यक्रमों के साथ यह एक प्रभावशाली लर्निंग मंच बन चुका है।
सतत स्किलिंग, रि-स्किलिंग और अप-स्किलिंग के जरिये युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने युवाओं के कार्य प्रोफाइल और उनके उद्यम को विकसित करने के साथ उनकी योग्यता बढाने की बात कही।


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