🌻धम्म प्रभात🌻
[ सहजातपच्चयो ति ]
चत्तारो खन्धा अरूपिनो अञ्ञमञ्ञं सहजातपच्चयेन पच्चयो। चत्तारो महाभूता अञ्ञमञ्ञं सहजातपच्चयेन पच्चयो। ओक्कन्तिक्खणे नामरूपं अञ्ञमञ्ञं सहजातपच्चयेन पच्चयो। चित्तचेतसिका धम्मा चित्तसमुट्ठानानं रूपानं सहजातपच्चयेन पच्चयो। महाभूता उपादारूपानं सहजातपच्चयेन पच्चयो। रूपिनो धम्मा अरूपीनं धम्मानं किञ्चिकाले सहजातपच्चयेन पच्चयो, किञ्चिकाले न सहजातपच्चयेन पच्चयो।
- चारों अरूपी स्कंध एक दूसरे के साथ सहजात प्रत्यय से संबद्ध होते है। चारों महाभूत एक दूसरे के साथ सहजात प्रत्यय से संबद्ध होते हैं। प्रतिसंधि के क्षण में नाम और रूप एक दूसरे के साथ सहजात प्रत्यय से संबद्ध होते हैं। चित्त चैतसिक धर्म चित्त से उत्पन्न होने वाले रूपों के साथ सहजात प्रत्यय से संबद्ध होते हैं। रूपी धर्म अरूपी धर्मों के साथ कभी- कभी सहजात प्रत्यय से संबद्ध होते है और कभी-कभी सहजात प्रत्यय से संबद्ध नहीं होते हैं।
सहजात प्रत्यय। सहजात, सहजात, एक साथ जागे, एक साथ उत्पन्न हुए। जो दोनों घटनाएं एक साथ होती हैं, दोनों एक साथ होती हैं।
चत्तरो खन्धा- ये जो मन के चार हिस्से हैं,ऐसा नहीं होता कि वे अलग-अलग हों। विज्ञान जागेगा तो उसके साथ बाकी के तीनों भी तुरंत जागेंगे।ये चारों स्कंध हैं वे एक साथ उत्पन्न हुए, इसलिए वे सहजता कहलाए।
जो चार महाभूत हैं वे भी एक साथ उत्पन्न होंगे। एक परमाणु में चारों के चारों समाए हुए होते हैं, वे एक साथ उत्पन्न होंगे। वहां भी वही सहजता है।
ओक्कन्तिक्खणे- जब किसी का जन्म होता है तब क्या होता है? धर्म के परिप्रेक्ष्य में जन्म उसको मानते हैं जब गर्भाधान होता है। माता के गर्भ से उत्पन्न होने को जन्म नहीं कहते, वह तो बाद की घटना है। जन्म की पहली घटना- यहां च्युत हुई, मृत्यु हुई और तुरंत अगले क्षण कहीं न कहीं गर्भाधान हुआ, वहां जन्म होगा। जब गर्भाधान होगा तब नाम और रूप दोनों जुडेंगे। क्योंकि वहां से जीवन शुरू हो गया,तो वह नाम और रूप भी दोनों सहजात- एक साथ उठेंगे अर्थात उत्पन्न होंगे।।
और इसी प्रकार चित्त से, चित्त की वजह से जो रूप जागता है वह चित्त की वजह से जागता है, उसमें भी गैप नहीं होता। और बहुत बार एक साथ दोनों के दोनों जागेंगे। चित्त भी जागेगा , क्योंकि हमारे पुराने कर्म के परिणामस्वरूप दोनों के दोनों एक साथ जागते हैं। तो चित्त और उससे उत्पन्न हुआ रूप, एक साथ जागते हैं।
और इसी तरह से जो चारों महाभूत हैं, और उनसे उत्पन्न महाभूत, एक साथ जागते हैं। क्योंकि चारों के चारों जुड़े हुए हैं, एक के साथ एक।
नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼
Ref: तिकपट्ठान सुत्त
25.06.2023


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