प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्षिण देशों के लिए विकास प्रमुख मुद्दा है और उन्हें संधारणीय विकास लक्ष्य प्राप्त करने की आवश्यक कार्य योजना के बारे में पूरे विश्व को मजबूत संदेश देना होगा। प्रधानमंत्री आज वीडियो संदेश के माध्यम से वाराणसी में जी-20 देशों के विकास मंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के कारण दुनिया के दक्षिणी देशों पर गंभीर असर पड़ा है, जबकि भू-राजनीतिक तनावों ने खाद्य, ईंधन और उर्वरक संकट को जन्म दिया है। इन स्थितियों में इन देशों का निर्णय पूरी मानवजाति के लिए महत्वपूर्ण होगा। विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर कल से आरंभ हुई विकास मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। यह बैठक कल तक चलेगी।
दो सौ से अधिक प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पारंपरिक भारतीय दर्शन का उल्लेख किया जो प्रकृति अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि भारत में नदियों, वृक्षों, पर्वतों और समस्त प्रकृति के प्रति महान आदर का भाव है।
जी-20 देशों के समक्ष विकास का मॉडल रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने एक सौ से अधिक सुविधावंचित आकांक्षी जिलों में लोगों के जीवन में सुधार का प्रयास किया है। ये जिले अब विकास के उत्प्रेरक के रूप में उभर रहे हैं। श्री मोदी ने जी-20 देशों के विकास मंत्रियों से विकास के इस मॉडल का अध्ययन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह वर्ष 2030 का एजेंडा प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए स्त्री-पुरूष की समानता और महिला सशक्तीकरण के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि भारत केवल महिला सशक्तीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह महिला नीत विकास की ओर उन्मुख है। उन्होंने कहा कि महिलाएं विकास का एजेंडा तय कर रही हैं और वे परिवर्तन की वाहक भी हैं। उन्होंने महिला नीत विकास के लिए कार्य योजना अपनाने का आग्रह किया।
काशी के महत्व का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सदियों से ज्ञान, गहन चिंतन, विचार-विमर्श, संस्कृति और आध्यात्मिकता का केंद्र रहा है। इसके साथ ही काशी भारत की विविधता पूर्ण विरासत को रेखांकित करते हुए देश के सभी भागों के लोगों का समागम स्थल भी है। श्री मोदी ने जी-20 विकास एजेंडा के काशी तक पहुंचने पर प्रसन्नता व्यक्त की।


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