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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻
 
[ तिकपट्ठान ]

यह प्रायःकर सर्वविदित है कि भगवान बुद्ध की शिक्षा तीन पिटकों में सुरक्षित है:
1) विनयपिटक
2) सुत्तपिटक 
3) अभिधम्मपिटक। 

विनयपिटक में मुख्यतया भिक्खुओ और भिक्खुणीयों द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों का संग्रह है।  इस में अन्य प्रकार  की महत्वपूर्ण  माहिती भी प्रचुर मात्रा में पायी जाती है। 

सुत्तपिटक में सर्वसाधारण के लिए सारगर्भित  उपदेशों का संग्रह  है। 

अभिधम्मपिटक में साधना में काफी आगे बढ़ हुए  साधकों के लिए भगवान  के अति गहन उपदेशों का संग्रह है।

अभिधम्मपिटक के अंतर्गत  सात ग्रंथ है जिन्हें प्रकरण ग्रंथ  कहते है।
यह सात प्रकरण ग्रंथ इस प्रकार है-
1) धम्मसङ्गणि 
2) विभङ्ग 
3) धातु-कथा 
4) पुग्गल- पञ्ञत्ति 
5) कथावत्थु 
6) यमक
7) पट्ठान ।

इनमें से पट्ठान को 'महा- पकरण' भी कहते है। जिसका अर्थ होता है महा-ग्रंथ  अर्थात विशाल ग्रंथ। इनमें नाम और रूप  के चौबीस प्रकार  के कार्य- कारण-भाव  की चर्चा करते हुए बतलाया गया है कि केवल निर्वाण ही असंस्कृत (अनिर्मित) है, बाकी सभी धर्म  संस्कृत (निर्मित) है।

भगवान को जब सम्यक सम्बोधि प्राप्त हुई तब बारह कडियां वाला  प्रतीत्यसमुत्पाद बिल्कुल स्पस्ट  होकर उनके सामने आया।  इससे ज्ञान जागा कि यह होने से यह होगा, और इस वजह से जो यह होता है, अलग होने में वह कारण बन जायगा- इस कार्य- कारण कई शृंखला उन्होने देखी उससे उन्हें बुद्धत्व प्राप्त हुआ।  चौथे सप्ताह उनके समक्ष  पट्ठान  प्रकट हुआ। । जो बारह कडियां प्रतीत्यसमुत्पाद की थी, पट्ठान तक आते- आते और   टुकडे होते- होते उनकी संख्या चौबीस  हो गई।  ये चौबीस  कडियां चौबीस प्रत्यय कहलाते हैं। 

ये है पट्ठान ।

हेतुपच्चयो 
आरम्मणपच्चयो
अधिपतिपच्चयो 
अनन्तरपच्चयो 
समनन्तरपच्चयो 
सहजातपच्चयो
अञ्ञमञ्ञपच्चयो 
निस्सयपच्चयो 
उपनिस्सयपच्चयो 
पुरेजातपच्चयो 
पच्छाजातपच्चयो 
आसेवनपच्चयो 
कम्मपच्चयो 
विपाकपच्चयो 
आहारपच्चयो 
इन्द्रियपच्चयो 
झानपच्चयो 
मग्गपच्चयो 
सम्पयुत्तपच्चयो
विप्पयुत्तपच्चयो
अत्थिपच्चयो 
नत्थिपच्चयो 
विगतपच्चयो 
अविगतपच्चयो ति।

नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼 
19.06.2023

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