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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻 

"ददतो पुञ्ञं  पवड्ढति, 
संयमतो वेरं न चीयति। 
कुसलो च जहाति  पापकं,  
रागदोसमोहक्खया सनिब्बुतो'ति।।"
                        -  तथागत 

अर्थात- दान देने से पुण्य बढता है, संयम से वैर नहीं संचित होता। सज्जन बुराई  को छोडता है, और राग-द्वेष-मोह के क्षय से वह निब्बान  ( निर्वाण ) प्राप्त  करता है । 

पुक्कुस द्वारा दिए  गए  इंगुर वर्ण वाले दुशाले से आच्छादित  बुद्ध  सोने के वर्ण जैसे शोभा देते थे। तब महाभिक्खुसंघ  के साथ भगवा  जहां ककुत्था नदी थी, वहां गए।  जाकर ककुत्था नदी को अवगाहन  कर, स्नान कर, पहनकर, उतरकर, जहां अम्बवन था , वहां गए।  जाकर आयुष्मान चुन्दक से बोले- 
चुन्दक! मेरे लिए  चौपेती  संघाटी  बिछा दे। चुन्दक  थक गया हूँ, लेटूंगा।  तब भगवा पैर पर पैर रख,  स्मृतिसंप्रजन्य के साथ, उत्थान- संज्ञा मन में करके, दाहिनी  करवट सिंह- शय्या  से लेटे।  अक्लांत  हो शास्ता लेट गए, चुंन्द भी वहां सामने बैठ गए। 
तब भगवा ने आयुष्मान  आनंद से कहा-
आनंद! शायद कोई  चुन्द कम्मार्रपुत्र को चिंचित करे और कहे -" आवुस चुन्द ! अलाभ है तुझे, दुर्लाभ कमाया, जो कि  तथागत तेरे पिंडपात को भोजनकर  परिनिब्बान को प्राप्त  हुए। "  आनंद! चुन्द  कर्म्मारपुत्र  की इस चिंता को दूर करना  और  कहना  - " आवुस ! लाभ है तुझे,  तूने सुलाभ  कमाया,  जो कि तथागत  तेरे  पिंडपात  को भोजनकर  परिनिब्बान  को प्राप्त हुए  " आवुस चुन्द ! मैंने यह भगवा के मुख से सुना,मुख से ग्रहण किया- यह दो पिंडपात समान फल वाले- समान विपाक वाले है,  दूसरे पिंडपातों  से बहुत  ही  महाफलप्रद है। 
कौन से दो?
1 . जिस पिंडपात को भोजनकर तथागत  सम्यक सम्बोधि को प्राप्त हुए। और।
2. जिस पिंडपात को भोजनकर  तथागत  महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए। 
आनंद! आयुष्मान  चुन्द  कम्मार्रपुत्र ने आयु प्राप्त  कराने वाले कर्म  को संचित  किया।  आनंद ! 
चुन्द  कम्मार्रपुत्र की चिन्ता को इस प्रकार  दूर करना। 

तब भगवा के उदान थे - 

"ददतो पुञ्ञं  पवड्ढति, 
संयमतो वेरं न चीयति। 
कुसलो च जहाति  पापकं,  
रागदोसमोहक्खया सनिब्बुतो'ति।।" 

नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
Ref: महापरिनिब्बान-सुत्त
26.07.2023
                  

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