[ किसे मुनि कहते है?]
"कायमुनि वचिमुनिं चेतोमुनिं अनासवं।
मुनि मोनेय्यसम्पन्नं आहु सब्बपहायिन'न्ति।।"
भिक्खुओ !
मौन तीन प्रकार के होते है।
- तथागत बुद्ध
कौनसे तीन प्रकार के?
शरीर का मौन,
वाणी का मौन,
मन का मौन।
भिक्खुओ ! शरीर का मौन कैसा होता है?
भिक्खुओ ! भिक्खु प्राणी हिंसा से विरत होता है। चोरी से विरत होता है,काम-भोग संबंधी मिथ्याचार से विरत होता है।
भिक्खुओ ! यह शरीरका मौन कहलाता है।
भिक्खुओ ! वाणी का मौन कैसा होता है?
"भिक्खुओ ! भिक्खु झूठ बोलने से विरत रहता है, चुगली करने से विरत रहता है, कठोरता से बोलने से विरत होता है, व्यर्थ बोलने से विरत रहता है।
भिक्खुओ ! यह वाणी का मौन कहलाता है।
भिक्खुओ ! मन का मौन कैसा होता है?
"भिक्खुओ ! भिक्खु आस्रवों का क्षय कर,अनास्रव चित्त-विमुक्ति, प्रज्ञा की विमुक्ति को इसी शरीर में अपने आप जानकर, साक्षात्कार प्राप्त कर विहार करता है।
भिक्खुओ ! वह मन का 'मौन' कहलाता है।
भिक्खुओ ! यह तीन मौन है।
जिसका शरीर मौन है,जिसकी वाणी मौन है, जिसका चित्त
मौन है- ऐसे मौन - युक्त,
सर्व - त्यागी अनास्रव जन को
मुनि कहते है।
नमो बुद्धाय 🙏🙏🙏
Ref: अंगुत्तर निकाय: मौन सुत्त
03.08.2023


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