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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻

'मिलिन्दपञ्हो'  (मिलिन्द प्रश्न) 

मिलिन्द यवन देश का एक शासक था।  बाद में यह भारतवर्ष के पश्चिमोत्तर भूभाग पर आधिपत्य जमा कर यहां का शासक बन गया।  इसकी राजधानी सागल थी। 
यह राजा बहुत से शास्त्रों में पारंगत और एक कुशल तार्किक था। इसने उस समय के सभी लब्धप्रतिष्ठ श्रमणों व ब्राह्मणों को वाद-विवाद में पछाड़ रखा था और उसे ऐसा लगने लगा था - अरे, तुच्छ हैं जंबूद्विप ! झूठ-मूठ ही इसका इतना नाम है।  यहां कोई भी ऐसा श्रमण या ब्राह्मण नहीं है, जो मेरे साथ संलाप करके, मेरी शंकाओं का निवारण कर सकें। 

अंतत: मिलिन्द राजा का शास्त्रार्थ अरहंत अवस्था प्राप्त स्थविर नागसेन भन्ते से हुआ, जिन्होंने मिलिन्द राजा के सभी प्रश्नों का समाधान कर दिया उन्हीं प्रश्नोत्तर का संग्रह - ग्रंथ कहलाता है - - 'मिलिन्दपञ्हो' । 
इस ग्रंथ की निगमन कथा के अनुसार यह रचना छ: कांडों और बाईस वर्गो में विभाजित है, और इसमें राजा मिलिन्द द्वारा पूछे गए प्रश्नों की कुल संख्या तीन सौ चार (304) है। 
बुद्ध धम्म को जानने के लिए और सद्धम्म का सही अर्थ समझने के लिए यह ग्रंथ का अभ्यास महत्वपूर्ण है। 
'मिलिन्दपञ्ह' ग्रंथ में राजा मिलिन्द के प्रश्नों के उत्तर में भन्ते नागसेन ने अनेक प्रकार के स्पष्टीकरण दिये, जैसे कि 
- यदि किसी के चित्त में मैल बना रहता है, तो वह जन्म ग्रहण करता हैं, यदी मैल नहीं बना रहता है, तो वह जन्म नहीं ग्रहण करता हैं। 
- कुशल घम्म है - शील, श्रद्धा, वीर्य, स्मृति और समाधि।  ये सभी धम्म, ज्ञान सहित, एक ही प्रयोजन सिद्ध करते हैं - दुःखों का विनाश। 
- एक जन्म के अंतिम विज्ञान के लय होते ही दूसरे जन्म का प्रथम विज्ञान उठ खडा होता है, ऐसी परिस्थिति में न तो वही जीव बना रहता है, और न कोई दूसरा ही हो जाता है। 
-ज्ञान और प्रज्ञा एक ही होते हैं।ज्ञान उत्पन्न होते ही मोह (अज्ञान)  दूर हो जाता है, जैसे अंधेरी कोठरी में दीपक जलाने से अंधेरा दूर हो जाता है। 
- अरहंत अवस्था को प्राप्त हुआ व्यक्ति शरीर में होने वाली वेदनाओं को अनुभव करता हैं, पर चित्त में होने वाली वेदनाओं को नहीं। 
- जैसे बीजों की विविधता के कारण पेड भी एक जैसे नहीं होते हैं, ऐसे ही मनुष्यों के कर्म नाना प्रकार के होने से मनुष्य भी एक जैसे नहीं होते हैं। 
- निरोध ( संपूर्ण उपशमन)  ही निर्वाण होता है। 
- यहां पैदा होकर यहीं मर जाना, यहां मर कर अन्यत्र पैदा होना, और वहां पैदा होकर वहीं मर जाना, वहां मर कर कहीं और पैदा हो जाना - इसे कहते हैं ' संसार' । 
वर्तमान समय में उत्पन्न होने वाली शंका - कुशंका का समाधान ' मिलिन्दपञ्ह ' में मिलता है। इसलिए, धम्म में रस रखने वाले को यह ग्रंथ का अभ्यास करना चाहिए। समस्या का समाधान अवश्य मिलेगा। 

नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
09.08.2023

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