सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट चेतन बैरवा का कहना है कि भारत के मुसलमान बाहर से आए हुए लोग नही हैं बल्कि ये यहीं के एससी , एसटी , ओबीसी के लोगो में से बने हुए लोग हैं । बाहर से तो कोई मुठ्ठी भर मुसलमान आए थे जिनकी कारण आज भारत में मुसलमानों की जनसंख्या 20 - 22 करोड़ नही हो सकती थी। हिंदुओ की बड़ी अजीब पॉलिसी है। पहले तो ये लोग यहीं के एससी , एसटी , ओबीसी के लोगो के साथ वर्ण व्यवस्था और मनु स्मृति वाली नफरत करेंगे , उनके साथ भेदभाव करेंगे , उनके साथ अन्याय करेंगे , उन्हे दूसरे धर्मो में जाने को मजबूर करेंगे जैसे कि मूंछ रखने पर किसी दलित को मार देना , पानी का घड़ा छूने पर किसी दलित को जान से मार देना , किसी आदिवासी के मुंह पर पिसाब कर देना । और फिर जब वो लोग हिंदू धर्म छोड़कर मुसलमान सिख ईसाई बन जाएंगे तो फिर वहां जाने पर भी उन्हें बुरा बताएंगे । आज ज्यादातर हिंदुओं को यह कहते हुए देखा जा सकता हैं कि 1947 में देश का विभाजन धर्म के नाम पर हुआ था तो फिर मुसलमान इंडिया में क्यों हैं , वो पाकिस्तान में क्यों नही चले गए । ठीक है माना कि देश का बटवारा धर्म के नाम पर हुआ था और इस हिसाब से सारे मुसलमान पाकिस्तान में होने चाहिए थे । लेकिन इस बात की क्या गारंटी हैं कि सारे मुसलमानों के पाकिस्तान में जाने के बाद , इंडिया में फिर से कोई नया मुसलमान नही बनेगा । क्योंकि एससी एसटी ओबीसी के साथ नफरतें तो फिर भी जारी ही रहेगी । ढोल गंवार शूद्र पशु नारी ये सब ताड़न के अधिकारी वाला फॉर्मूला तो फिर भी जारी ही रहेगा । इसलिए सारी बातों का लब्बे लुबाब यही है कि असल प्रोब्लम इस्लाम नही है बल्कि असल प्रोब्लम मनु स्मृति और उसमे दी गई वर्ण व्यवस्था है जिसके कारण एससी एसटी ओबीसी के लोग हिंदू धर्म छोड़ छोड़कर दूसरे धर्मो में चले जाते हैं , मुसलमान , सिख , ईसाई बन जाते हैं । इसलिए जब तक हिंदू धर्म में एससी एसटी ओबीसी के प्रति नफरत और भेद भाव जारी रहेगा , वो दूसरे धर्मो में जाते रहेंगे । मुस्लिम , सिख , ईसाई बनते रहेंगे । हिंदू धर्म में एससी एसटी ओबीसी के प्रति नफरत ही नफरत भरी हुई है। या यूं कहो कि हिंदू धर्म नफरतों का भंडार है जो अपने ही लोगो को दूसरे धर्मो में जाने को प्रेरित करता रहता है। एससी एसटी ओबीसी ही नही बल्कि क्षत्रिय लोग भी मुसलमान बने हैं । क्योंकि हिंदू धर्म में क्षत्रियों को भी ब्राह्मण के मुकाबले नीचा समझा गया है। मनु स्मृति के चैप्टर 2 के श्लोक 138 में साफ लिखा है कि 100 साल के क्षत्रिय को 10 साल के ब्राह्मण के बच्चे को अपने बाप के बराबर मानना पड़ेगा , क्यों मानना पड़ेगा इसका हिंदू धर्म के पास आज तक कोई जवाब नही है । पाकिस्तान के निर्माता मोह. अली जिन्ना का परिवार भी पहले गुजरात का हिंदू परिवार ही था जो ठक्कर जाती में आता था लेकिन नफरतों के चलते उस परिवार ने इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया । हिंदू धर्म अपने में तो सुधार करता नहीं और हर वक्त दूसरे धर्मो को कोसता रहता हैं जिससे हिंदू धर्म की समस्या हल होने वाली नही है ।
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चेतन बैरवा , एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट , मो 85 11 31 63 41 , 10 अगस्त 2023 , फेस बुक


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