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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻 

[भगवान ने अपने हाथों से रोगी तिस्स महास्थविर को नहलाया]

एक समय तिस्स शास्ता से प्रव्रज्या लेकर विपश्यना करने लगा। एक समय थेर तिस्स को भयंकर बीमारी हो गई। उनके शरीर पर छोटे - छोटे दाने फफोले के रूप में निकल आए और उनमें पीब भरने लगा। बाद में पीब बाहर आने लगा। भयंकर बदबू आने लगी। उनके कपड़े भी गंदे हो गए। उनका बदबू भरा चीवर उनके शरीर से चिपक गया । शरीर से खून की दुर्गन्ध आने लगी। पूरा का पूरा शरीर दुर्गन्धमय हो गया। अतः भिक्षुगण उन्हे ' पुतिगत्ततिस्स ' नाम से पुकारने लगे।

बुद्ध ने अपनी दिव्यदृष्टि से देखा कि थेर तिस्स रोगी है, बहुत कष्ट में है। उन्होंने देखा कि उसके सारे साथी भिक्खु उसकी यह हालत देखकर उससे अलग हो गए हैं। उन्होंने यह भी देखा कि उसके अन्दर अर्हत्व प्राप्त करने की संभावनाएं हैं। भगवान ने सोचा यही उपयुक्त समय है उसे सहायता प्रदान करना। वे रोगी व दु:खी उस भिक्खु की सेवा करने के लिए भगवान गए। नजदीक में जो अन्य 
भिक्खु थे वे भगवान को देखकर वहां आ गए। भगवान ने गर्म पानी मंगवाया और अपने हाथों से तिस्स का शरीर साफ किया।  फिर तिस्स को आग के पास ले जाने का भगवान ने निर्देश दिया। फिर उसे गर्म पानी से नहलाया गया और उसके शरीर को साफ कपड़े से पोंछा गया। उसके चीवर को भी साफ किया गया और उसे धूप में सुखाया गया। स्नान से तिस्स स्वच्छ हो गया और अच्छा अनुभव करने लगा। उसका शरीर निर्मल हुआ और उसके साथ-साथ उसका चित्त भी निर्मल हो गया। उसका मन साधना में दृढ़ हो गया। शास्ता जब तिस्स को स्नान करा रहे थे, उसका शरीर काठ की भाँति जमीन पर पड़ा हुआ था। भगवान ने भिक्खुओं को कहा- "भिक्षुओं ! देखो यह शरीर जमीन पर कैसे काठ की भांति पड़ा रहता है और धरती का बोझ बढ़ाता रहता है। निरर्थक लकड़ी की भांति फेंका गया यह शरीर जल्द ही धरती पर सदा के लिए सो जाएगा।  नौ द्वारों से सुसज्जित यह शरीर एक दिन शून्य हीन हो जाएगा।"

भगावान ने गाथा में कहा-
"अचिरं वतयं कायो,
पठविं अधिसेस्सति।
छुद्धो अपेतविज्ञाणो,
निरत्थं व कलिंगरं।।"

अहो ! यह तुच्छ शरीर शीघ्र ही चेतनाहीन हो निरर्थक काठ के टुकड़े की तरह धरती पर पड़ा रहेगा।
यही सत्य है जो चार महाभूतों से बना शरीर है, वह एक दिन चेतना विहीन होकर काठ की तरह हो जाता है। यह  नियम सभी प्राणियों पर लागू होता है।

भगवान की करूणा तिस्स महास्थविर को निर्वाण प्राप्त करने में शीघ्र सहायक हुई और महास्थविर तिस्स अर्हंत हो गए।

नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼
17.08.2023

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