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दबोह में मनाई गई संत गाडगे जयंती, मेधावी छात्रों को किया गया सम्मानित

  

बुद्ध प्रकाश बौद्ध दबोह भिंड मध्य प्रदेश 

भिंड :-दबोह, 23 फरवरी । कस्बे के वार्ड नं.- 6 में संत गाडगे समिति ने शाम 5 बजे स्वच्छता के जनक महान संत गाडगे बाबा की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत गौतम बुद्ध और बाबासाहब डॉ आंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई। 
इस अवसर पर मंचासीन लोगों ने संत गाडगे बाबा के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संत गाडगे का जन्म 23 फरवरी 1876 को हुआ था और वे लोगों से कहते थे कि शिक्षा बड़ी चीज है. पैसे की तंगी हो तो खाने के बर्तन बेच दो, औरत के लिए कम दाम के कपड़े खरीदो, टूटे-फूटे मकान में रहो पर बच्चों को शिक्षा दिए बिना न रहो. आधुनिक भारत को जिन महापुरूषों पर गर्व होना चाहिए, उनमें राष्ट्रीय सन्त गाडगे बाबा का नाम सर्वोपरि है. मानवता के सच्चे हितैषी, सामाजिक समरसता के द्योतक यदि किसी को माना जाए तो वे थे संत गाडगे.
गाडगे महाराज एक घूमते फिरते सामाजिक शिक्षक थे. वे पैरों में फटी हुई चप्पल और सिर पर मिट्टी का कटोरा ढककर पैदल ही यात्रा किया करते थे और यही उनकी पहचान थी. जब वे किसी गांव में प्रवेश करते थे तो गाडगे महाराज तुरंत ही गटर और रास्तों को साफ़ करने लगते और काम खत्म होने के बाद वे खुद लोगों को गांव के साफ़ होने की बधाई भी देते थे.

गांव के लोग उन्हें पैसे भी देते थे और बाबाजी उन पैसों का उपयोग सामाजिक विकास और समाज का शारीरिक विकास करने में लगाते. लोगों से मिले हुए पैसों से महाराज गांवों में स्कूल, धर्मशाला, अस्पताल और जानवरों के निवास स्थान बनवाते थे. गांवों की सफाई करने के बाद शाम में वे कीर्तन का आयोजन भी करते थे और अपने कीर्तनों के माध्यम से जन-जन तक लोकोपकार और समाज कल्याण का प्रसार करते थे. अपने कीर्तनों के समय वे लोगों को अन्धविश्वास की भावनाओं के विरुद्ध शिक्षित करते थे. अपने कीर्तनों में वे संत कबीर के दोहो का भी उपयोग करते थे.

महाराष्ट्र के प्रसिद्ध समाज सुधारकों में से वे एक थे. भारत सरकार ने भी उनके सम्मान में कई पुरस्कार जारी किये. इतना ही नही बल्कि अमरावती यूनिवर्सिटी का नाम भी उन्ही के नाम पर रखा गया है. संत गाडगे महाराज भारतीय इतिहास के एक महान संत थे. 20 दिसम्बर, 1956 को महाराज जी चल बसे लेकिन सबके दिलों में उनके विचार और आदर्श आज भी जिंदा हैं.

इस मौके पर मुख्य आयोजक उत्तम सिंह रजक, राहुल रजक, अजय रजक, प्रमोद रजक, मातादीन पटवारी,  एन डी धौलपुरिया, रामलखन बौद्ध, रमाशंकर भास्कर, बादाम सिंह जाटव शिक्षक, जगदीश रजक शिक्षक, नीरज रजक सहित अनेक गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।

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