भीम प्रकाश बौद्ध उप संपादक
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महात्मा गांधी जी ने जो सपना देखा था वह आज धूमल होता जा रहा है क्योंकि गांधी जी का सपना था कि हमारा देश स्वच्छता अभियान में अपना ऊंचा स्थान रखें लेकिन यह कागजों में संचालित किया जा रहा है जगह-जगह पर गंदगी पसरी होने से गांधी जी का सपना अधूरा लगता है अब हम बात एमपी के भिंड जिला के दबोह नगर का हाल भी किसी से छुपा नहीं है साफ सफाई भी ना मात्र की होती है नगर परिषद के सीएमओ स्वच्छता अभियान में कभी भी रुचि नहीं नहीं रखते ऐसे और भी कई जिले हैं जो की स्वच्छता अभियान के प्रति लापरवाही बढ़ती जा रही है जगह-जगह कचरा पॉलिथीन पड़ी रहती है जिससे आवारा जानवर खा जाते हैं और उनके शीघ्र ही मौत हो जाती है इसका जिम्मेदार कौन है स्वच्छता अभियान मात्र कागजों में संचालित होता है हकीकत से नजर डाली जाए तो वह सब मात्र दिखावा बनकर रह गया है सरकार स्वच्छता अभियान पर लाखों करोड़ों रुपया बर्बाद कर देती है लेकिन साफ सफाई ना के बराबर होती है जैसे ही गर्मी दस्तक देती है मच्छरों का बोल वाला बढ़ जाता है यह मच्छर इतनी तादाद में होते हैं किया है छोटे-छोटे बच्चों को उन पर हमला करके मलेरिया जैसी घातक बीमारियां फैलाने का काम करते हैं सरकार की तरफ से मच्छर मारने की दवा आती है वह कहां गायब हो जाती है इसका प्रयोग भी जिम्मेदार अधिकारी कभी भी नहीं करते हैं जिससे वह मच्छर मारने की दवा कई बार वर्षों तक राखी होने से उसका अस्तित्व नष्ट हो जाता है और वह दवा किसी काम की नहीं रहती है और जब कभी कबार ध्यान कर भी लिया तो वह किसी काम की नहीं बचती है और अधिकारी कहते हैं हमने मच्छर मारने की दवा डाल तो दिए इस प्रकार की लापरवाही नगर परिषद जैसे संस्थानों में आसानी से देखा जा सकता है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कभी भी निरीक्षण नहीं करते हैं नगर की जिम्मेदारी नगर परिषद के सीएमओ को होती है लेकिन वह कभी भी ऑफिस कार्यालय में नहीं आता है जिससे सफाई साफ सफाई जैसे अभियान मात्र दिखावा बनकर रह जाते हैं जितने भी वरिष्ठ अधिकारी हैं सब खाना पूर्ति करके घर जाने की पड़ी रहती है काम कोई नहीं करना चाहता है ऑफिस भी समय से नहीं खुलता है जब जिसकी मर्जी हुई जब आ जाते हैं इस प्रकार या सिस्टम ऐसे ही संचालित हो रहा है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने जो सपना देखा था वह अधूरा लगता है यदि वह आज जीवित होते तो शायद वह आंसुओं का सैलाब उनकी आंखों से नहीं रुकता इस प्रकार यह हालत एक छोटे से नगर के हैं तो बड़ी संस्थाओं का क्या हाल होगा इस प्रकार सभी संस्थाएं भगवान के भरोसे छोड़ दी गई है
यदि हम सब यह सोचते रहे स्वच्छता अभियान हमारा काम नहीं है यह तो सरकार का है यह संकीर्ण सोच होगी क्योंकि स्वच्छता अभियान महात्मा गांधी जी का सपना था कि हमारा देश स्वच्छ और सुंदर साफ-सफाई में नंबर वन रहे यह सोच महापुरुषों की सोच रही क्योंकि स्वच्छता अभियान मानव जीवन का अंग है यदि हम शरीर को ही देख लेना क्योंकि यदि हमने शरीर को साफ सुथरा नहीं रखा तो हम बीमार पड़ जाएंगे इसी प्रकार हमारा समाज हमारा देश जहां पर हम निवास कर रहे हैं यदि हमने साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा तो हमारा चारों तरफ का वातावरण गंदगी में हो जाएगा सभी लोग बीमारियों में जकड़ जाएंगे इसी प्रकार हमें सभी लोगों का ध्यान रखना होगा और स्वच्छता अभियान के प्रति लोगों को जागरूक करना होगा की स्वच्छता से हमारा कई लाभ है जिससे कि हम कभी बीमार नहीं पड़ेंगे और मच्छर जैसी गंभीर घातक बीमारियां मच्छर के काटने से होती है जब गंदगी नहीं होगी तो बीमारियां भी नहीं होगी यह हमारा सबका कर्तव्य की सफाई अभियान के प्रति जागरूक रहे यदि हम यही सोचते रहे की है सब कार्य सरकार का है तो वह संकीर्ण सोच होगी गलत है क्योंकि हमारा भी फर्ज बनता है कि हम भी सफाई के प्रति ध्यान रहे कूड़ा कचरा डस्टबिन में ही डालें ऐसी सोच रखकर सब कुछ समझना होगा भाईचारा और प्रेम की भावना रखनी होगी तभी हम सब मिलकर एक स्वच्छता अभियान के प्रति अपना दायित्व पूर्ण कर सकते हैं और महात्मा गांधी जी के सपनों का भारत हम एक नया बना सकते हैं और स्वच्छ स्वच्छ भारत अभियान एक सफल होना चाहिए तभी हम कह सकते हैं कि हम पूर्ण तरीके से शिक्षा के प्रति जागरुक है तभी हम आगे बढ़ सकते हैं अंत यदि हम एक दूसरे की बुराई करते रहे लड़ाई झगड़े में पढ़ते रहे तो हम देश को स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत नहीं देख पाएंगे यदि हमको स्वच्छ बनना है तो सबको एक होना होगा तभी हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सपनों का भारत का सपना पूरा कर सकते हैं!


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