[हेतुपच्चयो ति]
"हेतू हेतुसम्पयुत्तकानं धम्मानं तंसमुट्ठानानं च रूपानं हेतुपच्चेन पच्चयो। "
- हेतु प्रत्यय- हेतु हेतुओ से संयुक्त धर्मो और उनसे उत्पन्न होने वाले रूपों के साथ हेतु प्रत्यय से संबद्ध होते है।
हेतु कहते है कारण को।
किस कारण से यह प्रत्यय बना और क्या इसका प्रत्ययोत्पन्न (कारण से उत्पन्न) धर्म है, क्या उत्पन्न होता है इससे? तो कहा -
हेतू हेतुसम्पयुत्तकानं धम्मानं, तंसमुट्ठानानं च रूपानं हेतुपच्चेन पच्चयो। " इस हेतु से, हेतु के नियमों के कारण, उससे संयुक्त, उससे मिले हुए जो धर्म जागे तो जो चित्त पर जागा और उसकी वजह से तंसमुट्ठानानं च रूपानं उसके साथ जो रूप जागा, माने मैटर ( matter ) जागा, मन (mind) जागा और मैटर जागा- वह हेतु की वजह से हुआ।
हेतु प्रत्यय- को इसी परिपेक्ष्य में समझना चाहिए।
* धर्म स्वभाव को भी कहते हैं। जो कुछ चित्त पर जागता है, वह सारा का सारा धर्म कहलाता है। यहां संप्रदाय के अर्थ में धर्म शब्द का प्रयोग नहीं है।
नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼
Ref: तिकपट्ठान सुत्त
22.02.2024
Camp: Delhi


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