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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻 

[ लाभसत्कार खोटे पुरुष का विनाश करता है]

एक समय तथागत  राजगृह के वेळुवन में विहार  करते थे। 

उस समय राजकुमार अजातशत्रु पांचसो रथ लेकर देवदत्त के दर्शन के लिए जाता था। देवदत्त  पांचसो भोजन थाली भी भेजता था।  यह बात भिक्खुओ ने भगवान को  बताई। 

तब भगवान ने भिक्खुओं को कहा- भिक्खुओ! देवदत्त जैसे लाभसत्कार की स्पृहा मत करें।  यह लाभसत्कार से देवदत्त के सत्कर्मों की हानि होगी, लाभ नहीं।

भगवान ने गाथा में कहा-

"फलं वे कदलिं हन्ति 
फलं वेळुं फलं  नळं।
सक्कारो कापुरिसं  हन्ति 
गब्भो अस्सतरिं यथा।।"

- केले का फल केले के नाश का कारण होता है,
बांंस का फल बांस के नाश कारण होता है,
बरु का फल बरु के नाश का कारण होता है,
खच्चरी का गर्भ खच्चरी के नाश कारण होता है, वैसे ही लाभसत्कार  खोटे व्यक्ति का नाश करता है।

देवदत्त भिक्खु था। भगवान के संघ में प्रव्रजित होकर धम्म में आगे बढा। लेकिन, महत्वकांक्षा और इर्षा के कारण उसका अध:पतन होता था। कुछ सिद्धियां प्राप्त होने से वह अजातशत्रु जैसे को अपने प्रभाव में लाने के लिए सफल हुआ था। भगवान को मारने के लिए नालागिरि हाथी को भगवान पर छुड़वाया था और  गृध्रकूट पर्वत पर से शिलाखण्ड फेंक कर भगवान को मारने की कोशिश की थी। ऐसे खोटे आदमी को लाभसत्कार देने से उनका विनाश  होना ही  था। जीवन के अंतिम समय पश्चात्ताप से पीड़ित देवदत्त भगवान से माफ़ी मांगने के लिए श्रावस्ती पहुंचता है लेकिन अपने अकुशल कर्मों के कारण जेतवन में भगवान को मिले बिना जमीन में धंसकर मृत्यु को प्राप्त हुआ।  
लाभसत्कार की लालच(तृष्णा) रखने वाले बौद्ध भिक्खुओं को भगवान के इस वचन को याद  रखना चाहिए और  लाभसत्कार की तृष्णा का त्याग करना चाहिए। 

नमो बुद्धाय🙏🙏🙏 
Ref: देवदत्त सुत्त: संयुत्तनिकाय
05.07.2024

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