"तुम्हेहि किच्चं आतप्पं,
अक्खातारो तथागता।
पटिपन्ना पमोक्खन्ति,
झायिनो मारबन्धना। ।"
- धम्मपद: मल्ल वग्गो
- कार्य के लिए तुम्हें ही उद्योग करना है, तथागत का कार्य उपदेश देना है। मार्ग पर आरूढ हो, ध्यान में रत, (पुरुष) के बन्धन से मुक्त हो जाता है।-
भगवान बुद्ध ने प्राणीमात्र के हित और सुख के लिए धम्म को प्रकाशित किया है। बुद्ध का उपदेश शील, समाधि और प्रज्ञा के पथ पर आरूढ होकर सर्व प्रकार के दु:खों से मुक्त होने के लिए है। तृष्णा का समुच्छेद करके भवचक्र से मुक्त होकर जीवन मुक्त होने के लिए बुद्ध ने उपदेश किया है। धम्म पथ पर चलना है, कोरी बात करने से धम्म का लाभ मिल नहीं सकता है। बुद्ध के उपदेश को मानने वाले उन उपदेशो पर बहुत चर्चा करते है, किताबे लिखते है, प्रवचन करते है, लेकिन उन उपदेशों का अनुशरण नहीं करते है। ऐसे लोग धम्म का सही लाभ नहीं प्राप्त कर सकते है।
एक समय तथागत श्रावस्ती में जेतवन विहार में विहार करते थे। उस समय 500 बौद्ध भिक्खुओ जेतवन विहार में ठहरे हुए थे। वे भोजनोपरांत आपस में बातचीत कर रहे थे। उनकी बातें साधारणजनों की बाते थी- अमुक गांव सुंदर है, अमुक गांव खराब है, अमुक गांव का रास्ता अच्छा है, अमुक गांव का खराब। इस तरह की बातों में वे समय बिताते थे। उनको धम्म की गहराई और ध्यान की अनुभूति आदि के साथ कोई लेना देना नहीं था। वे बहिर्मुखी थे, जबकि उन्हें अंतर्मुखी होना चाहिए था। उन भिक्खुओं की मनोदशा को देखकर भगवान ने उन्हें धम्म का उपदेश देते हुए कहा- भिक्खुओ! तथागत तो उपदेश देते है। उन उपदेश पर चलना और प्राप्तव्य को प्राप्त करना स्वयं को है।
एक मरीज को चिकित्सक रोग की जांच करके दवाई लिख देता है और दवाई की मात्रा और कब दवाई लेना है, वह बताता है। साथ में परहेज भी बताता है। अगर मरीज चिकित्सक के बताए अनुसार दवाई का सेवन करता है तो निश्चित ही निरोग होता है। विपरित, चिकित्सक के ज्ञान के विषय में और दवाई के विषय में सिर्फ चर्चा करता रहेता है और दवाई का सेवन नहीं करता है, तो मरीज का रोग दूर नहीं होता है।
इसी तरह भगवान का उपदेश कल्याणकारी, सर्व दु:खों से छुटकारा दिलाने वाला होते हुए भी उसके पर नहीं चलते है तो दु:खों से मुक्त नहीं हो सकते है। अगर दु:खों से मुक्ति चाहते हो तो उसके पर चलना होगा। नाम स्मरण करने से, पूजापाठ करने से, तीर्थस्थल का दर्शन करने मात्र से दु:खों से संपूर्ण मुक्ति मिलनेवाली नहीं है। काम तो हमें करना पडेगा, शील, समाधि और प्रज्ञा के पथ पर आरूढ होना होगा, तब हमारे दु:ख दूर हो सकते है।
नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
08.08.2024


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