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मखमलीऔर मधुर आवाज़ की मलिका सुमन कल्याणपुर एक महान गायन हस्ती थी(भावपूर्ण श्रद्धांजली)


चित्रा न्युज प्रतिनिधी 
भंंडारा :+अपनी मखमली और मधुर सुरों की मलिका सुमन कल्याणपुर जी नहीं रही,हाल ही में इस गायन हस्ती का 89 वर्ष की आयु में निधन होगया.1960 और 70 के दशक में  उन्होंने अपने हिट और सदाबहार गीतों से दर्शकों पर जैसा जादू _सा कर दिया था,उनकी आवाज लताजी की अवाज से हुबहू मिलती थी ,जिससे श्रोताओं,दर्शकों को हमेशा यही महसूस होता था की ये लताजी की आवाज़ में गाया हुआ गाना है.उन्होंने कुल मिलाकर 857 हिन्दी गीत गाए है. 1953 में रिलीज मराठी फ़िल्म "शुक्राची चांदनी" के लिए उनको गाने का मौका मिला. अभिनेता शेख मुख्तार उनकी आवाज  से बहुत प्रभावित हुए और अपनी हिंदी फिल्म "मंगू" के लिए उनसे 3 गाने गवायें.1960 के दशक में रफ़ी साहब के साथ 140 से ज्य़ादा युगल गीत गाए. उनके गाए मशहूर गीतों में _आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जुबान पर,ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे, तुम ने पुकारा और हम चले आए,दिल ने फिर याद किया बर्फ सी लहराई है,अज हुना आए बालमा सावन बिता जाय, दिल एक मंदिर है, पर्बतो के पेड़ों पर शाम का बसेरा है (रफ़ी साहब के साथ) मेरा प्यार भी तू है (मुकेश जी), चलेजा_चलेजा जहाँ प्यार मिले,मेरे महबूब ना जा आज की रात न जा.. ,पानी में जले मेरा गोरा बदन, दिल ग़म से जल रहा है, बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है, न तुम हमे जानो ना हम तुम्हें जाने,हम सबको नेक राह चलाना मेरे अल्ला,जिन्दगी इम्तेहान लेती है सहित मराठी लोरी गीत "निंबोनीच्या झाडामागे चंद्र" ( फिल्म _बाळा गाऊ कशी अंगाई), व "भातुकलीचा खेळ मांड़ीला"आदि शामिल हैं. गदिमा प्रतिष्ठान, सूरश्रंगार सम्मान पुरस्कार,महाराष्ट्र का लतामंगेशकर पुरस्कार तथा भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2023 में उन्हें "पद्मभूषण पुरस्कार" से नवाजा गया था. उनके हर गीत को बड़े ही चाव  से सुनने का एक अलग ही लुत्फ आता था. सचमुच सुमन जी के चले जाने से फिल्मी जगत में जो कमी आयी है,वो शायद कभी पूरी हो,उनकी मखमली व मधुर आवाज रसिक श्रोताओं के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी ऐसे शब्दों में संगीत प्रेमी व लेखक मो.सईद शेख ने  सुमन कल्याणपुर को अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित  करते हुए व्यक्त की. 

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