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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की; दोनों देशों के बीच विभिन्‍न क्षेत्रों में सात समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए




दिल्ली (एआईआर):-भारत और नेपाल ने व्‍यापार और वाणिज्य, सीमापार पेट्रोलियम पाइपलाइन, एकीकृत जांच चौकियों का विकास, जल विद्युत परियोजनाओं और भुगतान व्‍यवस्‍था सहित सात समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड के साथ नई दिल्‍ली में हुई बातचीत के बाद प्रतिनिधि स्‍तर की वार्ता में समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अर्थव्‍यवस्‍था, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। 


दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्‍त रूप से भारतीय रेलवे की कार्गों ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह सेवा बथनाहा से नेपाल कस्‍टम यार्ड को जोड़ती है। उन्‍होंने रुपाईदिहा-नेपालगंज और सुनोली-भैईराहवा के बीच एकीकृत जांच चौकी का भी उद्धाटन किया।


संयुक्‍त संवाददाता सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि उन्‍होंने 2014 में अपनी नेपाल यात्रा के दौरान भारत नेपाल संबंधों के लिए एचआईटी फार्मूला दिया था। जिसका अर्थ है हाइवेज, आईवेज और ट्रांसवेज। उन्‍होंने कहा कि भारत ने अगले दस वर्षों में दस हजार मेगावाट बिजली नेपाल से आयात करने का लक्ष्‍य रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रामायण सर्किट से संबंधित परियोजनाओं तेजी से पूरा करने का निर्णय किया गया है। ताकि दोनों देशों के बीच सांस्‍कृतिक आदान प्रदान को बढ़ावा दिया जा सके।  नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में भारत की आर्थिक और विकास परिवर्तन की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध बहुत पुराने और बहुपक्षीय हैं।



श्री प्रचंड आज शाम राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से भी मिलेंगे। वे आज सुबह राजघाट गए और राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड भारत की चार दिन की यात्रा पर कल नई दिल्‍ली पहुंचे थे। पिछले वर्ष दिसंबर में कार्यभार ग्रहण करने के बाद श्री प्रचंड की यह पहली विदेशी द्विपक्षीय यात्रा है। उनकी यह यात्रा भारत की पड़ोसी प्रथम की नीति को मजबूत करने में दोनों देशों के बीच उच्‍चस्‍तरीय आदान-प्रदान की परम्‍परा बनाये रखने के क्रम में है। भारत और नेपाल के बीच सहयोग के सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध पिछले कुछ वर्षों में अधिक मजबूत हुए हैं। श्री प्रचंड कल उज्‍जैन और इंदौर भी जाएंगे।

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