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🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻

[बुद्ध की बोधि सुखकर है।]

नासमझ और नादान लोग बुद्ध पर दु:खवादी होने का मिथ्या आरोप लगाते है। आरोप है कि बुद्ध दु:ख की बात करते है। बुद्ध सुख की बात नहीं करते है। बुद्ध  कहते है- दु:ख है, दु:ख का कारण है, बिना कारण दु:ख उत्पन्न होता नहीं है। दु:ख का कारण है तो दु:ख निवारण का उपाय भी है। दु:ख निरोध का उपाय है तो उसका रास्ता भी होता है। बुद्ध की यह सत्य वाणी को बिना समझे नादान लोग बुद्ध पर दु:खवादी या निराशावादी होने का लांछन लगाते है।

एक वैज्ञानिक की भांति बुद्ध ने "दु:ख" रोग को जाना, दु:ख होने के कारण को जाना, जिन कारणों से दु:ख उत्पन्न होता है उसे दूर करने के उपाय भी जाने और जानने के बाद दवाई के रूप में मार्ग दिखाया। 

बुद्ध की यह अनोखी खोज को आज अरिय सत्य के नाम से जगत जानते है।
"अरिय सच्चानि" या
"अरिय अट्ठंगिको मग्गो" आदि में प्रयोजित शब्द 'अरिय' का अर्थ - 'आर्य' ग़लत किया गया है। 

अरिय शब्द का अर्थ है -
अर             = चक्र की तीली
अरि            = चक्र
अरिय          = चक्र से संबंधित
अरिय धम्म   = चक्र से संबंधित धर्म
अरिय मग्ग   = चक्र से संबंधित मार्ग
अरिय सच्च  = चक्र से संबंधित सत्य
धम्म चक्क पवत्तन का चक्क ( चक्र ) इसी अरिय मग्ग और अरिय सच्च से जुड़ा है।

"आर्य" शब्द "अरिय" शब्द का पर्याय नहीं है।
इतिहासकार और भाषावैज्ञानिकों ने अरिय मग्ग और अरिय सच्च का जो भाष्य आर्य मार्ग और आर्य सत्य के रूप में किया है, वह गलत है।

पालि में आर्य के लिए अलग शब्द है, वह है -अय्य।
 आर्य को पालि में " अय्य " कहा जाता है, "अरिय" नहीं।

बुद्ध ने कहा- 
दु:ख है।
दु:ख का कारण है।
दु:ख का निरोध है।
दु:ख निरोध का मार्ग भी है।
दु:ख निरोध का मार्ग है- " अरिय अष्टांगिक" मार्ग ।

दु:ख दूर करने का प्रयोजन सुख के लिए है , यह बात को नजरंदाज करके धम्म द्वेषी लोग बुद्ध पर मिथ्या आरोप लगाते है।
बुद्ध ने कहा-

"आरोग्य परमा लाभा,
सन्तुट्ठि परमं धनं।
विस्सासपरमा ञाती, 
निब्बानं परमं सुखं।।
             - धम्मपद
अर्थात- निरोग होना परम लाभ है, सन्तोष परम धन है, विश्वास सबसे बड़ा बन्धु है। निर्वाण सबसे बड़ा सुख है।

बुद्ध ने दु:ख मुक्ति के लिए उपदेश दिया है, इसलिए बुद्ध सुखवादी है, न कि दु:खवादी।

"सुखो बुद्धानं उप्पादो ।"

सुखदायक है- बुद्धों का जन्म।

नमो बुद्धाय🙏🏼🙏🏼🙏🏼
29.07.2023

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