Ticker

6/recent/ticker-posts

🌻धम्म प्रभात🌻

🌻धम्म प्रभात🌻 

[सम्यक सम्बोधि के बाद भगवान बुद्ध ने सात सप्ताह  बोधिवृक्ष के आसपास  बिताए थे।] 

बौद्ध साहित्य में सात सप्ताहों का वर्णन निम्न प्रकार मिलता है-

पठमं बोधि पल्लकं,

दुतियं च आनम्मिसं,
 
ततियं चंकमनं सेट्ठं, 

चतुत्थं रत्नाघरं, 

पंचमं  अजपालं च, 

मुचलिन्देन छट्ठमं, 

सत्तमं राजायतनं,
 
वन्दे तं मुनिसेवितं। 
बोधिसत्त्व  सिद्धार्थ राजकुमार ने ३५ साल की उम्र में उरुवेला में निरंजना नदी के किनारे एक पिपल के वृक्ष के नीचे सम्यक सम्बोधि प्राप्त की। वह वैशाख पूर्णिमा की रात थी। सम्यक सम्बोधि प्राप्त होने से सिद्धार्थ बुद्ध हुए। 

ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध वहीं बोधिवृक्ष (पिपल वृक्ष) के आसपास ७ सप्ताह ध्यान में व्यतीत करते दिखाई देते हैं।

"अथ खो भगवा बोधिरूक्ख मूले सन्नाहं एक पल्लकेन निसीद्द, विमुक्ति सुख।"

प्रथम सप्ताह 'वज्रासन' पर ध्यान में बुद्ध ने सम्बोधि सुख का अनुभव लिया।

'अनिमेष लोचन' स्थान से दुसरे सप्ताह बुद्ध बोधिवृक्ष को देखते हुए बुद्ध दिखाई देते है।

 तीसरा सप्ताह  चंक्रमण करते हुए दिखाई देते हैं। वह स्थान आज 'रतन चंक्रमण' नाम से जानते है। 

चौथा सप्ताह 'रतनघर' पर प्रतित्यसमुत्पाद का अनुभव करते हुए व्यतीत किया।

पांचवां सप्ताह बुद्ध ने बरगद के पेड़ के नीचे बिताया। जिस स्थान को 'अजपाल निग्रोध' नाम से जाना जाता है।

छठवां सप्ताह 'मुंचलिंग नाग' स्थान पर मुशलधार वर्षा में व्यतीत किया।

सातवां सप्ताह बुद्ध ने राजायतन वृक्ष के नीचे बिताया। यह स्थान आज 'राजायतन' नाम से जानते है। 

आज भी इन सात पवित्र स्थान के दर्शन श्रद्धालु उपासक और उपासिकाओं को भावविभोर करते हैं।

नमो बुद्धाय🙏🙏🙏 
25.05.2024

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या