भीम प्रकाश बौद्ध दबोह भिंड
मो 9754 84 3705
मध्य प्रदेश में प्राइवेट फैक्ट्रियां जो संचालित हो रही है। वह नियम के विरुद्ध चल रही है। भारतीय संविधान में अंकित है। 8 घंटे से ज्यादा मजदूरी न कराई जाए, लेकिन प्राइवेट फैक्ट्रियां जो है। वह कानून का उल्लंघन कर रही है। उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है ।
गरीब मजदूर वर्ग वह मजबूरी बस प्राइवेट फैक्ट्रियों में काम करने के लिए मजबूर रहता है। क्योंकि वह अपने बच्चों को पेट का भरण पोषण कैसे करें और गरीब और मजदूर प्राइवेट फैक्ट्री के बालों मलकों से कुछ नहीं कह सकते हैं । क्योंकि वह है। 12 घंटे काम करवा कर मजदूरी भी समय पर नहीं देते अब सवाल यह उठता है । की 12 घंटे में मजदूर अपने बच्चों को भी ध्यान नहीं रख पा रहा है ।
पढ़ाई लिखाई यह सब कोसों दूर है । जब सारे नियम बने हुए हैं। तो फिर यह प्राइवेट फैक्ट्रियां अपना अलग से नियम क्यों सरकार को चाहिए की इन मालिकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए इस तरीके से मजदूरों का शोषण हो रहा है। इस शोषण को नहीं रोका गया तो इसी तरीके से हमारे मजदूर वर्ग एवं गरीब वर्ग शोषण की चक्की में पिस्ता रहेगा आजादी क्या होती है। वह मजदूर नहीं जानता है। ग्वालियर दिल्ली जैसे बड़े शहरों में प्राइवेट फैक्ट्रियां कम पैसों में मजदूरों से कार्य करवा रही है। इन पर प्रतिबंध लगाना होगा तभी गरीब वर्ग के जीवन में खुशी आ सकती है । अंत वह अपना जीवन गुलामी मैं बीत जाएगा । यदि कोई मजदूर आवाज उठाता भी है तो उसको धमकी दी जाती है कार्य करना हो तो करो अंत में कंपनी से निकाल दिया जाएगा इसी मजबूरी में मजदूर मजबूरी बस प्राइवेट फैक्ट्रियों में अपना जीवन गुजार देता है ।यदि सरकार ने इन प्राइवेट फैक्ट्री वाले मालिकों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो इसी प्रकार से मजदूर अपना जीवन अंधेरी की दुनिया में खो जाएगा।


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