भीम प्रकाश बौद्ध दबोह भिंड
मो 9754 84 3705
जल संकट की जो स्थिति आज हमारे सामने है ।इसके जिम्मेदार भी हम हैं। हम प्रकृति से लेना तो जानते हैं। मगर उसे लौट आया नहीं भूजल का दोहन जिस प्रकार से हो रहा है। इसे संचय नहीं किया किया जा रहा है। बहुत से लोगों को शायद ही याद है । उन्होंने आखरी बात पौध रोपण कब किया था ।समस्या कैसे हल होगी पानी हमारी जरूरत का सबसे बड़ा साधन तो है। पर उसे सहेज कर रखने की नीति और नियत का आभाव् है । हम पानी मिलने पर तो है। हाय तौबा मचाते हैं । मगर उसे बचाने का एक भी उपाय नहीं करते हैं। आने वाले दिनों में पानी का संकट हमारे लिए बड़ा संकट बनकर आ रहा है। आज सबसे ज्यादा जो तपन हो रही है । इसका मुख्य कारण है । कि हमने पेड़ पौधों को नष्ट कर दिया है। जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। इंसान अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहा है। यदि हम पानी की प्रति जागरूक नहीं हुए परिणाम बुरे हो सकते हैं । आने वाले दिनों में पानी के लिए युद्ध होंगे तब पता चल जाएगा की पानी कितना अमूल है। फिर भी हम नहीं जागे लापरवाह बनी रहे तो वह दिन दूर नहीं जब पानी पीने के लिए भी तरसना पड़ जाएगा ।


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