【'धम्मपद' एक अनुपम श्रेष्ठ ग्रंथ】
धम्मपद बुद्ध वचन है। इसमें गाथाएं मात्र है।
धम्मपद बुद्ध धम्म का ही नहीं, बल्कि संपूर्ण श्रमण संस्कृति का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
'धम्मपद' बौद्ध साहित्य का सर्वोत्कृष्ट लोकप्रिय श्रेष्ठ ग्रंथ है। इसमें तथागत बुद्ध के उपदेशों का संग्रह है। बुद्ध वचन यानी कल्याणकारी उपदेश। मनुष्य के कल्याण के लिए बुद्ध ने ४५ वर्ष तक जो उपदेश दिए उनमें से चुनकर 'धम्मपद' ग्रंथ बना है। मानो स्वास्थ्य वर्धक सुगंधित फुलों को एक टोकरी में भरा है।
'धम्मपद' एक पालि शब्द है। जिसका अर्थ है- "सिद्धांत के शब्द" या "सत्य का मार्ग"।
'धम्मपद' मूल बौद्ध शिक्षाओं का संग्रह है, जो आसान सूक्तियों की शैली में हैं। सुत्तपिटक के खुद्दकनिकाय के दूसरे पाठ के रूप में 'धम्मपद' में 26 वग्ग में 423 गाथाएं हैं।
'धम्मपद' ग्रंथ की शुरुआत मन- Mind के विषय से होती है।
जैसे प्रथम दो गाथाएं है-
"मनोपुब्बंगमा धम्मा
मनोसेट्ठा मनोमया।
मनसा चे पदुट्ठेन,भासति वा करोति वा ।
ततो नं दुक्खमन्वेति चक्कं व वहतो पदं ।।" (१)
दूसरी गाथा है-
"मनोपुब्बंगमा धम्मा
मनोसेट्ठा मनोमया।
मनसा चे पसन्नेन,
भासति वा करोति वा,
ततो नं सुखमन्वेति छाया व अनपायिनी ।।" (२)
इस महान ग्रंथ के प्राकृत, संस्कृत और चीनी भाषा में संस्करण और अन्य भाषाओं में अनुवाद भी उपलब्ध हैं। दुनिया की सभी भाषाओं में 'धम्मपद' ग्रंथ का अनुवाद हुआ है।
'धम्मपद' ग्रंथ थेरवाद और महायान, दोनों परंपराओं को मानने वाले बौद्ध देशों में लोकप्रिय है।
श्रीलंका में 'धम्मपद' को शताब्दियों से नवदीक्षित भिक्षुओं के मार्गदर्शन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और कहा जाता है कि प्रत्येक भिक्षु को यह कंठस्थ है।
संगीतकारों ने संकलन करते समय विषय क्रम को ध्यान में रखते हुए चार सौ तेईस ( ४२३ ) गाथाओं को छब्बीस वर्गों ( पालि भाषा में वग्ग ) में संकलित किया। संकलन बनाते हुए उन्होंने कालक्रम का कोई ध्यान नहीं रखा, सिर्फ विषय का ध्यान रखा।
बुद्ध धम्म को जानने और समझने के लिए और अपने कल्याण के लिए इस ग्रंथ पढ़ना चाहिए और उनमें बताए गए उपदेशों का अनुसरण करना चाहिए। ऐसे अनुसरण करने वाले का जीवन सुगंधित पुष्प की तरह हमेशा महकता रहता है और सुखमय जीवन बिताता है।
नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
24.09.2024


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