[सम्यक सम्बोधि के बाद भगवान बुद्ध ने सात सप्ताह बोधिवृक्ष के आसपास बिताए]
सात सप्ताहों का वर्णन निम्न प्रकार मिलता है-
पठमं बोधि पल्लकं,
दुतियं च आनम्मिसं,
ततियं चंकमनं सेट्ठं,
चतुत्थं रत्नाघरं,
पंचमं अजपालं च,
मुचलिन्देन छट्ठमं,
सत्तमं राजायतनं,
वन्दे तं मुनिसेवितं।
ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध वहीं बोधिवृक्ष (पिपल वृक्ष) के आसपास 7 सप्ताह ध्यान में व्यतीत करते दिखाई देते हैं।
"अथ खो भगवा बोधिरूक्ख मूले सन्नाहं एक पल्लकेन निसीद्द, विमुक्ति सुख।"
प्रथम सप्ताह 'वज्रासन' पर ध्यान में बुद्ध ने सम्बोधि सुख का अनुभव लिया।
'अनिमेष लोचन' स्थान से दुसरे सप्ताह बुद्ध बोधिवृक्ष को देखते हुए दिखाई देते है।
तीसरा सप्ताह चंक्रमण करते हुए दिखाई देते हैं। वह स्थान आज 'रतन चंक्रमण' नाम से जाना जाता है।
चौथा सप्ताह 'रतनघर' पर प्रतित्यसमुत्पाद का अनुभव करते हुए व्यतीत किया।
पांचवां सप्ताह बुद्ध ने बरगद के पेड़ के नीचे बिताया। जिस स्थान को 'अजपाल निग्रोध' नाम से जाना जाता है।
छठवां सप्ताह 'मुंचलिंद सरोवर ' स्थान पर मुशलधार वर्षा में व्यतीत किया।
सातवां सप्ताह बुद्ध ने राजायतन वृक्ष के नीचे बिताया। यह स्थान आज 'राजायतन' नाम से जानते है।
बोधिवृक्ष की छाया में बैठकर ध्यानस्थ होकर उन सात स्थानों का दर्शन किया। बडा सुखकर था अंतर्मन से दर्शन। फिर ध्यान से उठकर खुली आंखों से उन पवित्र स्थान देखे। श्रीलंकाई श्रद्धावान बौद्ध उपासक व उपासिका की संख्या आज अधिक थी। सफेद वस्त्र धारण कर हाथ में पुजा के लिए पुष्प लेकर एक पंक्ति में चलते शान्तिपूर्वक धीमी आवाज से साधु.साधु..साधु...बोलते दिखाई दिए। भगवान के प्रति उनकी श्रद्धा और धम्म में विश्वास देखकर मन धम्म तरंगो से भर गया ।
नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
बोधगया ( बिहार)
14.09.2024


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